सर्वे का उद्देश्य यह जानना कि बच्चे आयु और कक्षा के अनुरूप सीखने के स्तर तक पहुंचे रहे या नहीं
- Neha Gupta
- Jun 11, 2026
अमनदीप सिंह | अमृतसर गर्मी की छुट्टियों के बीच जिले में बच्चों की सीखने की क्षमता का बड़ा आकलन होने जा रहा है। एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट (असर) के तहत नर्सरी से 10वीं तक के बच्चों की पंजाबी, इंग्लिश, गणित और डिजिटल दक्षता का मूल्यांकन किया जाएगा। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) वेरका की ओर से 14 और 15 जून को अमृतसर के शहरी क्षेत्र में सर्वे करवाया जाएगा। सर्वे के लिए चयनित टीमों को 11 से 13 जून तक विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह सर्वे बच्चों की वास्तविक सीखने की स्थिति और बुनियादी शैक्षणिक क्षमताओं की तस्वीर सामने लाएगा। एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट के तहत जिले में व्यापक स्तर पर बच्चों की शैक्षणिक दक्षताओं का आकलन किया जाएगा। सर्वे में 3 से 15 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को शामिल किया जाएगा। सर्वे के दौरान बच्चों की पंजाबी, इंग्लिश, गणित तथा डिजिटल कार्यों से जुड़ी समझ और दक्षता को परखा जाएगा। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के प्रिंसिपल सुखदेव सिंह सर्वे का उद्देश्य केवल परीक्षा लेना नहीं, बल्कि यह जानना है कि बच्चे अपनी आयु और कक्षा के अनुरूप सीखने के स्तर तक पहुंच रहे हैं या नहीं। इसके लिए विभाग की ओर से विशेष मूल्यांकन टूल उपलब्ध करवाया जाएगा, जिसमें विभिन्न आयु वर्ग के अनुसार गतिविधियां और प्रश्न निर्धारित किए गए हैं। सर्वे 14 और 15 जून को अमृतसर के शहरी क्षेत्र में किया जाएगा। इससे पहले 11, 12 और 13 जून को डाइट वेरका में सर्वेकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान मूल्यांकन प्रक्रिया, बच्चों से संवाद करने के तरीके और आंकड़े एकत्र करने संबंधी जानकारी दी जाएगी। सर्वे से प्राप्त आंकड़े भविष्य की शैक्षणिक योजनाओं और सीखने के स्तर में सुधार के लिए आधार बनेंगे। एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट देशभर में बच्चों के सीखने के स्तर का आकलन करने वाला महत्वपूर्ण सर्वे है। इसके तहत बच्चों की पढ़ने, समझने, गणितीय कौशल और अन्य बुनियादी दक्षताओं का मूल्यांकन किया जाता है। सर्वे का उद्देश्य यह पता लगाना होता है कि बच्चे अपनी आयु और कक्षा के अनुरूप सीख पा रहे हैं या नहीं। इस बार अमृतसर में 3 से 15 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की पंजाबी, इंग्लिश, गणित और डिजिटल दक्षता का मूल्यांकन किया जाएगा। सर्वे के नतीजे शिक्षा की वास्तविक स्थिति समझने में मदद करते हैं। इसके आधार पर सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाना आसान होगा।

