भास्कर न्यूज | अमृतसर दमदमी टकसाल के प्रमुख सेवादार भाई हरनाम सिंह खालसा और शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के प्रधान व पूर्व सांसद सिमरनजीत सिंह मान के बीच जारी विवाद थमने की बजाय गहरा गया है। दोनों पक्षों में 31 मई से शुरू हुआ आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला अब और तेज हो गया है। दमदमी टकसाल प्रमुख हरनाम सिंह खालसा ने सिमरनजीत सिंह मान को फिर धमकी भरे लहजे में कहा है कि टकसाल तथा उनके खिलाफ जारी दुष्प्रचार अविलंब बंद करें। अगर मान ने अपना दुष्प्रचार जारी रखा तो ऐसा सबक सिखाया जाएगा कि वह किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहेंगे। उन्होंने कहा कि मान चौक मेहता न आए अन्यथा िवरोध का सामना करना पड़ेगा। ^आतंकवाद के दौर में सिख पंथ का पहले ही बड़ा नुकसान हो चुका है। मौजूदा टकराव को रोकने के लिए श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज अथवा एसजीपीसी प्रधान हरजिंदर सिंह धामी को पहलकदमी करते हुए दोनों में समझौता करवाना चाहिए। धार्मिक नेताओं की मध्यस्थता जरूरी है। - पुरुषोत्तम सिंह, सिख बुद्धिजीवी। सिख चिंतक डॉ. रणबीर सिंह ने कहा कि दोनों पक्ष सियासी बयानबाजी कर प्रदेश के माहौल को भड़काने का काम कर रहे हैं। ऐसे बयानबाजी करके दोनों सियासी रोटियां सेंक रहे हैं। वाकयुद्ध पर अंकुश लगाना चाहिए क्योंकि यह विवाद प्रदेश के शांतमय माहौल के हित में नहीं है। पहले ही प्रदेश में कानून व्यवस्था का जनाजा निकल चुका है। दमदमी टकसाल के प्रवक्ता प्रो. सरचांद सिंह ने भाई खालसा का बचाव करते हुए कहा कि सिमरनजीत सिंह मान पूरी तरह बौखला गए हैं। वह नहीं चाहते कि दमदमी टकसाल में बरसी समागम शांतिपूर्वक संपन्न हो। यह विवाद भाई खालसा ने नहीं, बल्कि मान ने जानबूझकर पैदा किया है। हर साल बरसी के दिनों में वह साजिश के तहत ऐसी बयानबाजी करते हैं ताकि संगत समागम में भाग न ले सके। भाई खालसा ने मान को जान से मारने की कोई सीधी धमकी नहीं दी है, बल्कि पंजाब का माहौल खुद मान खराब करना चाहते हैं।

