कल सोमवती अमावस्या,19 से शुरू होंगे विवाह

भास्कर न्यूज | अमृतसर आने वाले 15 दिनों में श्रद्धालुओं को दो बार पुण्य स्नान का मौका मिलेगा। पहला स्नान सोमवार, 15 जून को ज्येष्ठ अधिकमास की अमावस्या तिथि को और दूसरा इसके ठीक 15 दिन बाद 29 जून को पूर्णिमा तिथि पर होगा। इस दौरान श्रद्धालुओं को पवित्र नदियों में गोते लगाकर पुण्य लाभ, पितृ तर्पण व दान-पुण्य करने का अवसर मिलेगा। साथ ही 15 से 19 जून तक पांच दिनों में चार बड़े शुभ संयोग भी बन रहे हैं। इस बार दो ज्येष्ठ होने की वजह से कुल 59 दिनों का महीना चल रहा है, जो 29 जून को संपन्न होगा। अभी अधिकमास के 5 दिन बचे हैं। यह साल की पहली सोमवती अमावस्या है। इसके अगले दिन 16 जून से शुद्ध ज्येष्ठ मास शुरू होगा और 19 जून से शादी-ब्याह के मांगलिक कार्य पुनः शुरू होंगे। रानी का बाग के पंडित राम अवतार ने बताया कि शुद्ध मास यानी वास्तविक चंद्र मास सूर्य संक्रांति के अनुसार सामान्य रूप से आता है, जबकि अधिकमास अतिरिक्त जोड़ा गया महीना होता है। इसे स्वयं भगवान विष्णु ने अपना नाम (पुरुषोत्तम मास) दिया है, इसलिए इसमें जप, तप, दान और व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है। शुद्ध मास सामान्य सांसारिक कार्यों के लिए उचित है, जबकि अधिकमास विशेष आध्यात्मिक साधना के लिए होता है। इसी महीने गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी भी आएगी, जो विशेष फलदायी होगी। ज्योतिषीय गणना के मुताबिक, 30 साल बाद 15 जून को ज्येष्ठ अधिकमास की सोमवती अमावस्या का योग बना है, जो अब इसके बाद वर्ष 2046 में आएगा। विद्वानों ने बताया कि 14 जून को दोपहर 12 बजकर 19 मिनट पर अमावस्या तिथि लग जाएगी, लेकिन 15 जून को उदया तिथि होने के कारण इसी दिन अमावस्या मनाई जाएगी। इस दिन मंगल प्रधान मृगशिरा नक्षत्र और आनंद योग बन रहा है। अधिकमास की अमावस्या वैसे तो हर तीन वर्ष बाद आती है, लेकिन ज्येष्ठ मास की अमावस्या 30 साल बाद पड़ रही है। मान्यता के अनुसार, इस दिन पितृ दोष और अन्य परेशानियों को दूर करने के लिए किए गए उपाय विशेष शुभ फल प्रदान करते हैं। भगवान विष्णु को समर्पित अधिकमास को पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। इस अधिकमास की शुरुआत 17 मई को हुई थी। तीन साल में एक बार आने वाला यह मास इससे पहले वर्ष 2023 में आया था। अधिकमास शुरू होते ही विवाह आदि मांगलिक कार्य बंद हो गए थे, जो अब इसके पूरा होने के बाद ही शुरू होंगे। इस दौरान शहर के मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठान और विशेष आध्यात्मिक साधनाएं चल रही हैं। शुद्ध ज्येष्ठ माह की प्रमुख तिथियां कुछ इस तरह रहेंगी। जिसमें 15 जून को सोमवती अमावस्या, 17 जून को रंभा तीज, 18 जून को विनायक चतुर्थी, 23 जून को महेश नवमी, 25 जून को एकादशी, 27 जून को प्रदोष, 29 जून को पूर्णिमा होगी। पं. राधेश्याम के अनुसार, 19 जून से विवाह मुहूर्त समेत मुंडन, उपनयन, नामकरण, अन्नप्राशन, गृह प्रवेश, गृहारंभ और नवीन व्यापार आदि के शुभ संस्कार शुरू हो जाएंगे। विवाह के शुभ मुहूर्त 12 जुलाई तक ही रहेंगे। इसके बाद 25 जुलाई से चातुर्मास शुरू होने से अगले 4 महीनों के लिए मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाएगी।