बाबा बंदा सिंह बहादुर ने मुगलों के साथ जंग लड़ते हुए जहां किया था विश्राम, वहीं आज होगा विशेष शहीदी समागम
- DSS Admin
- Jun 13, 2026
भास्कर न्यूज | जालंधर बाबा बंदा सिंह बहादुर जी को सिखों के महान योद्धा और सरहिंद के अत्याचारी नवाब वजीर खान को सजा देने वाले के रूप में याद किया जाता है। उन्होंने मुगलों के खिलाफ संघर्ष का नेतृत्व किया और खालसा राज की नींव रखी। उनकी याद में हर साल जून में श्रद्धासुमन अर्पित किए जाते हैं। जालंधर से भी बाबा बंदा सिंह बहादुर का संबंध रहा है। यहां टैगोर अस्पताल के पास गुरुद्वारा बाबा बंदा सिंह बहादुर स्थित है। मान्यता है कि जब बंदा बहादर मुगलों के जुल्मों को खत्म करने के लिए विभिन्न जिलों के लिए निकले थे तो वह जालंधर में इस स्थान पर रुके थे। उनके साथ विशाल सेना थी। फौजी घोड़ों को पुरानी सब्जी मंडी के पास बांधा गया था। शहर में पंज पीर के पास भी बंदा बहादुर की याद में गुरुद्वारा साहिब सुशोभित है। बंदा सिंह बहादुर का इतिहास बहादुर शाह द्वारा वादे से मुकरने के बाद, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने बैरागी माधोदास को अमृत छकाकर ‘बंदा सिंह बहादुर’ बनाया और उन्हें मुगलों के अत्याचार समाप्त करने का दायित्व सौंपा। बाबा बंदा सिंह ने खालसा फौज का नेतृत्व करते हुए सरहिंद के नवाब वजीर खान को परास्त कर सिख राज की नींव रखी और गुरुओं के नाम के सिक्के चलाए। बाद में, गुरदास नंगल की घेराबंदी में भीषण कष्ट सहकर भी वे विचलित नहीं हुए। धर्म रक्षा हेतु उन्होंने अपने मासूम पुत्र की शहादत देखी और स्वयं भी अमानवीय यातनाएं सहकर शीश कटा लिया, परंतु झुकना स्वीकार नहीं किया।

