50 हजार तक की साइबर ठगी पर बिना एफआईआर वापस मिलेगी रकम

भास्कर न्यूज | जालंधर ऑनलाइन ठगी (साइबर फ्रॉड) के शिकार लोगों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है। केंद्र सरकार के नए नियमों के मुताबिक, यदि साइबर धोखाधड़ी में फंसी हुई रकम 50,000 तक है, तो उसे वापस पाने के लिए अब पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने की जरूरत नहीं होगी। पीड़ित व्यक्ति एक इंडेम्निटी बॉन्ड के जरिए सीधे अपने बैंक खाते में यह पैसा वापस पा सकेंगे। सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को बेहद आसान और डिजिटल बनाने के लिए एक नया ऑनलाइन प्लेटफॉर्म शुरू किया है, जिससे लोगों को अब अदालतों या थानों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। पोर्टल पर जाएं और लॉगइन करें : सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट https://mrm-ncrp.mha .gov.in/ पर जाएं। वहां ‘सिटीजन लॉग इन’ पर क्लिक करें और एनसीआरपी शिकायत में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी के जरिए लॉगइन करें। रिफंड रिक्वेस्ट शुरू करें: लॉगिन करने के बाद ‘रेज रिफंड रिक्यूएस्ट’ के विकल्प पर क्लिक करें। अपनी 14-अंकों की कंप्लेंट आईडी दर्ज करें और दोबारा ओटीपी डालकर इसे वेरिफाई करें। वेरिफिकेशन के बाद होल्ड की गई राशि स्क्रीन पर दिखने लगेगी। दस्तावेज और बैंक डिटेल्स भरें : अपना पेन कार्ड स्कैन करके अपलोड करें। इसके बाद जिस बैंक अकाउंट में आप पैसा वापस पाना चाहते हैं, उसका अकाउंट नंबर और आईएफएससी कोड दर्ज करें। रिक्वेस्ट सबमिट करें और ट्रैक करें : दिए गए ‘चेक बॉक्स’ को टिक करके फॉर्म सबमिट कर दें। सबमिशन के बाद आपको एक यूनिक रिक्यूएंस्ट आईडी (जैसे- एमआर 2026....) मिलेगी, जिससे आप भविष्य में अपने रिफंड का स्टेटस ट्रैक कर सकेंगे। 50,000 तक की राशि (एक खाते में): यदि किसी एक बैंक खाते में 50,000 तक की रकम होल्ड है, तो इसके लिए किसी एफआईआर या कोर्ट के आदेश की जरूरत नहीं होगी। इंडेम्निटी बॉन्ड के आधार पर पैसा सीधे पीड़ित के खाते में भेज दिया जाएगा। अगर आपका पैसा विभिन्न खातों में टुकड़ों में होल्ड है तब भी एफआईआर की जरूरत नहीं होगी। 50,000 से ज्यादा राशि (एक ही खाते में): यदि किसी एक ही बैंक खाते में 50,000 से ज्यादा की राशि होल्ड हुई है, तो नियमानुसार एफआईआर होना अनिवार्य है। इसके बाद पूरी कानूनी प्रक्रिया इसी एमआरएम पोर्टल के माध्यम से पूरी होगी। केवल वही पीड़ित आवेदन कर सकते हैं जिन्होंने साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत एनसीआरपी पोर्टल या 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई थी और उनके पास 14-अंकों का एक्नोलेजमेंट नंबर है। इस पोर्टल के जरिए केवल वही पैसा वापस मिलेगा जो धोखेबाजों के बैंक खातों में होल्ड कराया जा चुका है। अगर अपराधियों ने खाता से पैसा निकाल लिया है, तो यह पोर्टल उसके लिए नहीं है।