भास्कर न्यूज | जालंधर हिंदू धर्म में तीन साल में एक बार आने वाली दुर्लभ परमा एकादशी का विशेष महत्व है। अधिक मास (मलमास) के कृष्ण पक्ष में आने वाला यह व्रत इस साल 2026 में ज्येष्ठ महीने में पड़ रहा है। इस बार यह वीरवार को होगा। भगवान विष्णु को समर्पित इस पावन दिन पर चावल खाना पूरी तरह वर्जित माना जाता है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि जो भी भक्त इस दिन विधि-विधान से व्रत रखते हैं, उनकी गंभीर से गंभीर आर्थिक तंगी और दरिद्रता दूर हो जाती है। तीन साल में सिर्फ एक बार आने के कारण इस एकादशी का फल सामान्य एकादशियों से कहीं अधिक और चमत्कारी माना गया है। तिथि और शुभ मुहूर्त तारीख: 11 जून, वीरवार प्रारंभ: 10 जून को रात 10:15 बजे से समाप्ति: 11 जून को रात 08:35 बजे व्रत खोलने का समय: 12 जून को सुबह 05:23 से 08:10 बजे के बीच व्रत की मुख्य विधि सुबह स्नान करें और साफ (संभव हो तो पीले) कपड़े पहनें। भगवान विष्णु की मूर्ति के सामने जल लेकर व्रत का संकल्प करें। भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी और पंचामृत अर्पित करें। ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें। रात के समय विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने का विशेष महत्व है। अगले दिन (द्वादशी को) जरूरतमंद को भोजन करा व्रत खोलें पौराणिक कथा के अनुसार ज्ञानी ब्राह्मण सुमेधा और उनकी पत्नी पवित्रा भयंकर दरिद्रता से पीड़ित थे। पत्नी की सलाह पर सुमेधा ने परदेस जाने का विचार छोड़कर ऋषि कौंडिन्य के निर्देशानुसार विधि-विधान से 'परमा एकादशी' का दुर्लभ व्रत किया। इस व्रत के प्रभाव से उनकी गरीबी दूर हुई और उन्हें अपार धन-वैभव मिला।

