पति बेडरूम तक लाता था पालतू कुत्ते को, साथ सुलाता था, पत्नी से अनबन, बात तलाक तक पहुंची, घर टूटने से बचा
- DSS Admin
- Jun 11, 2026
सुरिंदर सिंह | जालंधर आज के दौर में जहां छोटी-छोटी बातों पर हंसते-खेलते परिवार बिखर रहे हैं, वहीं जालंधर से एक ऐसा अनोखा मामला सामने आया है जहां एक पालतू जानवर (कुत्ता) पति-पत्नी के बीच अलग होने की वजह बन गया। पति जहां अपने पालतू कुत्ते को परिवार के सगे सदस्य की तरह प्यार करता था, वहीं पत्नी को उसकी मौजूदगी और आदतों से सख्त ऐतराज था। यह मतभेद इस कदर बढ़ा कि बात कोर्ट-कचहरी और तलाक तक पहुंच गई। हालांकि, समय रहते इस मामले में फ्री फैमिली काउंसलिंग सेल की एंट्री हुई और संस्था की सूझबूझ से एक घर टूटने से बच गया। इस जटिल मामले को सुलझाने में फ्री फैमिली काउंसलिंग सेल की अध्यक्ष परवीन अबरोल ने बेहद महत्वपूर्ण और सराहनीय भूमिका निभाई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद परवीन अबरोल ने न केवल उनके बीच की गलतफहमियों को दूर किया, बल्कि रिश्ते को बचाने के लिए कुछ व्यावहारिक नियम भी तय करवाए। 1. कुत्ता अब घर के हर कोने या बेडरूम में नहीं जाएगा। उसके उठने-बैठने और सोने के लिए घर में एक अलग जगह तय की गई है। 2. कुत्ते की ग्रूमिंग, उसे टहलाने और उसकी गंदगी साफ करने की पूरी जिम्मेदारी पति की होगी, ताकि पत्नी पर इसका बोझ न पड़े। 3. पति अपने पालतू जानवर के साथ एक सीमित समय ही बिताएगा और बाकी का समय अपनी पत्नी और परिवार को देगा। दरअसल, युवक को बचपन से ही कुत्ते पालने का शौक था। शादी के बाद भी वह अपने पालतू कुत्ते को अपने बच्चे या परिवार के सदस्य की तरह ही रखता था। कुत्ते का सोफे पर बैठना, बेडरूम में आना, यहां तक कि डाइनिंग टेबल के आसपास घूमना पति के लिए बिल्कुल सामान्य था। वह दफ्तर से आते ही अपनी पत्नी से बात करने के बजाय पहले कुत्ते के साथ खेलने में व्यस्त हो जाता था। दूसरी तरफ, पत्नी को इस माहौल से बेहद परेशानी थी। उसे घर में हर जगह कुत्ते के बाल गिरने, उसकी महक और साफ-सफाई की कमी से चिढ़ होने लगी। शुरुआत में पत्नी ने इसे सामान्य तौर पर लिया, लेकिन जब पति ने उसकी शिकायतों को नजरअंदाज करना शुरू कर दिया, तो बात बिगड़ गई। धीरे-धीरे छोटी-छोटी बातों पर होने वाली बहस रोज के बड़े झगड़ों में बदल गई। पत्नी को लगने लगा कि पति के जीवन में उसकी अहमियत उस जानवर से भी कम है, वहीं पति को लगता था कि पत्नी क्रूर है और उसके शौक को नहीं समझती। यह गलतफहमी इस कदर बढ़ी कि पत्नी मायके चली गई और दोनों ने अलग होने का मन बना लिया। परवीन अबरोल ने बताया कि काउंसलिंग के समय पति के लिए कुत्ता भावना से जुड़ा मुद्दा था, जबकि पत्नी के लिए साफ-सफाई और प्राइवेसी की समस्या। दोनों पक्षों में ईगो साफ दिख रही थी। संस्था ने दोनों को अलग और संयुक्त रूप से समझाया। पति को जीवनसाथी की मानसिक शांति का महत्व बताया गया और पत्नी को पति की भावनाओं का सम्मान करने के लिए प्रेरित किया गया। अबरोल के हस्तक्षेप से दोनों परिवारों को टूटने से बचा लिया गया। आपसी सहमति से कुछ कड़े नियम तय हुए, जिन्हें दोनों ने स्वीकार किया और मुस्कुराते हुए भविष्य में साथ रहने का वादा किया।

