सेवा के बिना ईश्वर की प्राप्ति संभव नहीं

भास्कर न्यूज | जालंधर कमल विहार स्थित श्री नीलकंठ महादेव मंदिर में श्री श्री राधावल्लभ चैरिटेबल ट्रस्ट एवं श्री जी आरोग्य सेवा सदन के तत्वावधान में 11वीं श्रीमद् भागवत कथा व रस महोत्सव के चौथे दिन बृज किशोर शरण महाराज ने दान और सेवा का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि दान तन, मन और धन- तीनों से होना चाहिए। तन से समाजसेवा, धन से भूखों को भोजन और आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था को उन्होंने दान का रूप बताया। कथा में भक्तराज अंबरीष के चरित्र का वर्णन करते हुए बताया गया कि विशाल राज्य और उच्च पद पर रहते हुए भी उनमें अहंकार नहीं था। वक्ता के अनुसार वे प्रातः मंदिर जाकर स्वयं झाड़ू-पोछा करते थे। उन्होंने कहा कि सेवा के बिना न पद प्राप्त होता है, न ईश्वर की प्राप्ति संभव है। कथा विश्राम पर श्रीराम जन्म और श्रीकृष्ण जन्म की बधाइयां गाई गईं तथा नंद के आनंद भयो के साथ नंद महोत्सव मनाया गया। कार्यक्रम में महिला संकीर्तन मंडल की सदस्याएं उपस्थित रहीं।