जालंधर में मनरेगा बदलाव और स्मार्ट मीटर पर भारी प्रदर्शन:किसान-मजदूरों ने DC दफ्तर का किया घेराव,पंजाब सरकार के विरुद्ध की जमकर नारेबाजी
- Admin Admin
- Jan 16, 2026
जालंधर में आज किसान-मजदूर यूनियन संघ के बैनर तले विशाल रोष प्रदर्शन किया गया, जिसमें भारी संख्या में किसानों और मजदूरों ने जिला उपायुक्त यानी DC कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों का मुख्य विरोध मनरेगा योजना में सरकार द्वारा किए जा रहे उन तकनीकी और प्रशासनिक बदलावों को लेकर है, जिन्हें वे मजदूर विरोधी मान रहे हैं। इसके साथ ही, किसानों ने बिजली के 'स्मार्ट मीटर' लगाने के सरकार के फैसले पर कड़ा एतराज जताते हुए पंजाब सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार इन जन-विरोधी फैसलों को वापस नहीं लेती, उनका संघर्ष जारी रहेगा और आने वाले दिनों में वे पूरे राज्य में आंदोलन को और तेज करेंगे। जालंधर के प्रशासनिक परिसर में आज सुबह से ही गहमागहमी का माहौल बना रहा। जिले भर से आए किसानों और मजदूरों ने एकजुट होकर सरकार की नीतियों को चुनौती दी। यूनियन के नेताओं ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार एक तरफ आम आदमी की सरकार होने का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ ऐसी नीतियां लागू कर रही है जो सीधे तौर पर गरीबों और किसानों की जेब पर डाका डाल रही हैं। मनरेगा में बदलाव का तीखा विरोध यूनियन के पदाधिकारियों ने कहा कि मनरेगा योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन सरकार इसमें नए नियम और डिजिटल हाजिरी जैसी शर्तें थोपकर मजदूरों को उनके हक से वंचित कर रही है। उनका तर्क है कि गांवों में इंटरनेट और स्मार्टफोन की समस्याओं के कारण मजदूरों की दिहाड़ी मारी जा रही है। किसानों का कहना है कि सरकार मनरेगा का बजट और कार्य दिवस बढ़ाने के बजाय, इसे जटिल बनाकर धीरे-धीरे खत्म करने की साजिश रच रही है, जो मजदूरों के हितों के साथ खिलवाड़ है। स्मार्ट मीटरों पर सरकार को घेरा प्रदर्शन का दूसरा सबसे बड़ा मुद्दा 'स्मार्ट बिजली मीटर' रहा। किसानों ने दो टूक शब्दों में कहा कि वे गांवों और घरों में स्मार्ट मीटर नहीं लगने देंगे। उनका मानना है कि ये मीटर निजीकरण की ओर एक कदम हैं और इससे बिजली के बिलों में भारी बढ़ोतरी होगी, जिसे गरीब तबका वहन नहीं कर पाएगा। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि विभाग ने जबरन मीटर लगाने की कोशिश की, तो अधिकारी और कर्मचारी खुद इसके जिम्मेदार होंगे। यूनियन नेताओं ने अंत में घोषणा की कि यह केवल एक शुरुआत है। यदि पंजाब सरकार ने उनकी जायज मांगों पर जल्द कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो वे राज्य स्तरीय आंदोलन की घोषणा करेंगे।



