तपती धूप में ममता और जिम्मेदारी... कहीं घर का काम छोड़ राहगीरों की प्यास बुझा रहीं माताएं, तो कहीं पुदीने के ठंडे पानी से मजदूरों...
- Neha Gupta
- Jun 11, 2026
भास्कर न्यूज | जालंधर जून के इस महीने में सूरज मानो आग उगल रहा है। आसमान से बरसती धूप और गर्म हवा के लू ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। पारा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है, और ऐसे में घर से बाहर निकलने वाले राहगीरों का हाल बेहाल है। लेकिन इस भीषण तपिश के बीच, समाज में मानवता और सेवा की एक ऐसी ठंडी बयार भी बह रही है, जो लोगों को न सिर्फ राहत दे रही है बल्कि उनका हौसला भी बढ़ा रही है। शहर के अलग-अलग कोनों से दो ऐसी कहानियां सामने आई हैं, जहां महिलाएं और पुरुष अपने-अपने स्तर पर पानी की सेवा में जुटे हैं। महिला और पुरुष, दोनों की कहानियां भले ही अलग-अलग बैकग्राउंड और काम करने के तरीकों से जुड़ी हों, लेकिन दोनों का मकसद एक ही है, कोई भी इंसान इस धूप में प्यासा न रहे। शहर के माई हीरां गेट रोड में दोपहर 1 बजते ही महिलाओं का एक समूह सक्रिय हो जाता है। सपना थापर, सोनिया सोनी, पूनम, वाणी, दिया थापर, ममता, आरती व अन्य महिलाओं ने बताया कि वह घर का काम निपटाकर दोपहर में यहां आती हैं। इन्होंने न तो किसी से चंदा मांगा और न ही किसी बड़ी संस्था की मदद ली। खुद ही सारी व्यवस्था बनाई। छोटे बच्चों और उनके साथ आई माताओं को देखकर ये महिलाएं खुद आगे बढ़कर उन्हें पानी देती हैं।

