जीवन के अंतिम पड़ाव पर कुदरत का आशीर्वाद, 20 हजार पौधे लगाकर पार्क बनाया
- Neha Gupta
- Jun 13, 2026
हेमंत | जालंधर 80 साल पुराने मकसूदां के बाबा दादा मल श्मशान भूमि के लिए साल 2004 बदलाव वाला रहा। यहां अंतिम संस्कार की संख्या बढ़ी तो इलाके में प्रदूषण भी बढ़ा। ऐसे में श्मशानभूमि सुधार सभा आगे आई। फैसला लिया- श्मशानभूमि को हरियाली भरा बनाएंगे। बस फिर क्या था? अध्यक्ष राज कुमार मागो की देखरेख में सभा सदस्य हिसार गए और जामुन, आम, अनार, लीची, आड़ू, किन्नू, सागवान, नीम और पीपल के पौधे लाए आए। यह पौधे अब पेड़ बन गए हैं। इनकी छांव का फायदा परिसर में आने वाला हर शख्स उठाता है। माहौल इतना अच्छा है कि यहां जनतक बैठकें भी होती हैं। प्रधान मागो बताते हैं- एक बार प्रशासनिक अधिकारी से बैठक थी। उन्होंने श्मशानभूमि का पता दे दिया। इस पर अधिकारी हंसने लगे। लेकिन जब वह अधिकारी यहां आए तो यहां की भव्यता देखकर हैरान हो गए। उन्होंने कमेटी सदस्यों की तारीफ की व इसके डेवलपमेंट के लिए हौसला बढ़ाया। ये हैं मेंबर : चेयरमैन प्राण नाथ भल्ला, प्रधान राज कुमार मागो, जनरल सेक्रेटरी सोम राज और नीरज जस्सल, फाइनांस सेक्रेटरी राज कुमार महाजन, वाइस प्रधान गुरदियाल भट्टी, वाइस प्रधान जीवन दस्सन, हरि कृष्ण, वरिंदर दत्ता व अन्य मेंबर शामिल है। बाग में लगे आम। मकसूदां की बाबा दादा मल श्मशान भूमि। सभा सदस्यों ने जब श्मशान भूमि का कायाकल्प करने का जिम्मा उठाया तो यहां चौतरफा बड़े-बड़े गड्ढे थे। लोग जुटे और सभी के सहयोग से फंड इकट्ठा होना शुरू हो गया। गड्ढे मिट्टी से भरने के बाद यहां पौधे लगाए गए। जो अब हरे-भरे हो गए हैं। इनकी देखभाल करने के लिए 3-4 माली भी तैनात किए गए हैं। यहां वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और पौधों की सिंचाई के लिए स्प्रिंकलर पाइप प्रणाली लगाई गई है, जिससे पानी कम लगता है।

