जालंधर | हिंदू पंचांग के अनुसार हर महीने की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। यह भगवान शिव को समर्पित है और इसे करने से जीवन में खुशहाली बनी रहती है। मान्यता है कि इस दिन पूजा और व्रत करने से महादेव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों के सभी संकट दूर करते हैं। इस दिन भक्त सुबह से ही शिवालयों में जल, दूध, बिल्वपत्र, धुर्वा, फल, भांग, धतूरा, आदि सामग्री से भगवान शंकर का अभिषेक कर सकते हैं। { सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और प्रदोष व्रत का संकल्प लें। { पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़क शिव-पार्वती मूर्ति स्थापित करें { भगवान शिव को जल चढ़ाकर उनके मंत्रों का जाप करें। { प्रदोष व्रत की मुख्य पूजा शाम को प्रदोष काल में की जाती है (सूर्यास्त से लगभग एक घंटा पहले)। { शिवजी को शमीपत्र, बेल पत्र, कनेर, धतूरा, चावल, फूल, धूप, दीप, फल, पान, सुपारी, आदि अर्पित करें। { अंत में शिव आरती करें, प्रसाद बांटें और फिर भोजन लें। { शिव चालीसा और शिवाष्टक का पाठ लाभकारी होता है। ^प्रदोष व्रत रखने वाले व्यक्ति और उसके परिवार पर भगवान शिव की कृपा बनी रहती है। भगवान शिव उन्हें धन, आयु, बल, पुत्र, सुख, और सौभाग्य प्रदान करते हैं। यह व्रत पुराने पापों को दूर करता है और मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति में सहायक होता है। -पुजारी गौतम भार्गव, शिव दुर्गा खाटू श्याम मंदिर

