ड्रग और सामाजिक-आर्थिक जनगणना में जबरन ड्यूटियां लगाने पर आक्रोश

भास्कर न्यूज | जालंधर पंजाब ड्रग और सामाजिक-आर्थिक जनगणना के लिए प्रशासन द्वारा शिक्षकों और अन्य सहायक कर्मचारियों की ड्यूटियां लगाए जाने से विवाद खड़ा हो गया है। जारी आदेशों के अनुसार, मास्टर कैडर, लेक्चरर, ईटीटी अध्यापकों और अन्य सहायक कर्मचारियों को इन्यूमरेटर व सुपरवाइजर नियुक्त किया गया है। प्रशासन ने सख्त चेतावनी दी है कि निर्धारित तिथियों पर उपस्थित न होने या लापरवाही बरतने पर नियमों के तहत विभागीय कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, इस फैसले को लेकर कर्मचारियों और शिक्षक संगठनों में गहरी नाराजगी और आक्रोश देखा जा रहा है। कर्मचारियों का आरोप है कि पहले इस सर्वे कार्य के लिए स्वेच्छा से आवेदन मांगे जा रहे थे, लेकिन अब विभागीय स्तर पर सीधे और जबरन ड्यूटियां थोप दी गई हैं। इससे उन पर अतिरिक्त मानसिक और काम का दबाव बढ़ गया है। कई शिक्षक पहले से ही अन्य जनगणना संबंधी कार्यों में व्यस्त हैं और अभी तक पुरानी किट भी जमा नहीं करवा पाए हैं। हद तो यह है कि पैर में फ्रैक्चर होने के बावजूद एक शिक्षक की ड्यूटी लगा दी गई, जिन्होंने इसके लिए कोई आवेदन भी नहीं किया था। विवाद का एक और गंभीर पहलू चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों (जैसे पियून और स्वीपर) को इन्यूमरेटर और सुपरवाइजर की जिम्मेदारी सौंपना है। एक पियून ने बताया कि उनका नियमित काम पानी पिलाना और फाइलें पहुंचाना है, ऐसे में तकनीकी व क्लेरिकल प्रकृति के इस सर्वे कार्य से उन्हें भारी मानसिक परेशानी हो रही है। डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट के जिला प्रधान कुलविंदर सिंह ने आरोप लगाया कि अनुभवहीन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों पर काम का बोझ डाला गया है, जबकि कुछ रसूखदार लोगों ने प्रभाव का इस्तेमाल कर अपनी ड्यूटियां कटवा ली हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन हर काम के लिए शिक्षकों को आगे कर देता है और अब कार्रवाई की धमकी देकर डराया जा रहा है। इस मुद्दे को लेकर गवर्नमेंट टीचर्स यूनियन ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और शिक्षा सचिव को पत्र भेजा है। यूनियन ने स्पष्ट किया कि सरकारी विज्ञापन के एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया के अनुसार, यह कार्य कार्यालय समय के बाद और छुट्टियों में स्वेच्छा से करने वाले कर्मचारियों से करवाया जाना था। इसके बावजूद जिला प्रशासन जबरन ड्यूटियां लगा रहा है। यूनियन ने मांग की है कि केवल इच्छुक कर्मचारियों को ही इस कार्य में लगाया जाए। ^ यह पूरी तरह से प्रशासनिक आदेश हैं। शिक्षा विभाग केवल प्राप्त निर्देशों का पालन कर रहा है और उनकी पालना सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। विभाग का कार्य शासन द्वारा निर्धारित नीतिगत निर्णयों को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित करना है। -मनीष शर्मा, डिप्टी डीईओ (सेकेंडरी)