स्कूल ऑफ एमीनेंस में खाली सीटों पर पास के स्कूलों या पड़ोसी जिलों के छात्र 12 जून तक ले सकेंगे दाखिला

भास्कर न्यूज | जालंधर स्कूल ऑफ एमीनेंस में नौवीं और ग्यारहवीं कक्षा की खाली सीटों को भरने के लिए शिक्षा विभाग ने नए निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने कहा है कि यदि किसी स्कूल ऑफ एमीनेंस में किसी भी श्रेणी की सीटें खाली हैं और उस श्रेणी का कोई योग्य छात्र उपलब्ध नहीं है तो 12 जून तक आसपास के स्कूलों या पड़ोसी जिलों के योग्य छात्रों को दाखिला दिया जाए। यदि इसके बाद भी सीटें खाली रहती हैं, तो उन्हें जनरल (ओपन) श्रेणी में बदल दिया जाएगा। इसके बाद सरकारी या निजी स्कूल के किसी भी योग्य छात्र को 15 जून तक दाखिला देकर सीटें भरनी होंगी। जालंधर शहर में देहात क्षेत्र को छोड़कर चार स्कूल ऑफ एमीनेंस हैं। इनमें कई सीटें खाली पड़ी हैं। भार्गव कैंप स्थित स्कूल ऑफ एमीनेंस में नौवीं कक्षा की 36 सीटों में से केवल 20 सीटें भरी हैं, जबकि 16 सीटें खाली हैं। ग्यारहवीं की 128 सीटों में से 55 छात्रों ने दाखिला लिया है। स्कूल के वरिष्ठ अध्यापक के अनुसार स्कूलों की मैपिंग व्यवस्था में बदलाव के कारण कई छात्रों को दूर-दराज के स्कूल आवंटित हो गए हैं। नकोदर के हुसैनीपुर गांव के बच्चों को भी इस स्कूल में सीटें मिली हैं, जिससे वह इतनी दूर एडमिशन नहीं ले रहे। उन्होंने बताया कि यह स्कूल पहले केवल लड़कों का स्कूल था और हाल ही में को-एड बना है। कई अभिभावक अभी भी इसे लड़कों का स्कूल मानते हैं, इसलिए लड़कियों का दाखिला कराने में हिचकिचाते हैं। कुछ विद्यार्थियों को मनपसंद विषय नहीं मिलने की समस्या भी है। स्कूल ऑफ एमीनेंस मकसूदां में नौवीं की 36 में से 32 सीटें भर चुकी हैं, जबकि ग्यारहवीं की 128 सीटों में से 54 सीटों पर दाखिले हुए हैं। यहां के शिक्षकों का कहना है कि मैपिंग की वजह से रंधावा मसंदा और अन्य दूर के क्षेत्रों के छात्रों को यहां सीटें मिली हैं, जिसके कारण कई विद्यार्थी दाखिला नहीं ले रहे। उनका कहना है कि अब आसपास के जिलों के विद्यार्थियों के लिए भी सीटें खोल दी गई हैं, जिससे सीटें भरने में आसानी होगी। स्कूल ऑफ एमीनेंस लाडोवाली के अध्यापक ने उम्मीद जताई है कि मेरिटोरियस स्कूलों की प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद कई विद्यार्थी यहां दाखिला लेने आएंगे और सीटें भर जाएंगी। वहीं मॉडल टाउन स्थित स्कूल ऑफ एमीनेंस के अध्यापक ने बताया कि 30 से अधिक सीटें भरी गई हैं। ग्यारहवीं में 20 से 25 सीटें और भरने की संभावना है। विभाग ने कहा कि यदि कोई छात्र अपने स्कूल की बजाय किसी दूसरे स्कूल में दाखिला लेना चाहता है तो उसे पहले अपने प्रिंसिपल से अनुमति लेनी होगी। दोनों स्कूलों को रिकॉर्ड रखना होगा।