बदलाव छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मानसिक रूप से करेगा तैयार

भास्कर न्यूज | जालंधर पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड ने शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए कक्षा 8वीं, 10वीं और 12वीं कक्षा की वार्षिक परीक्षाओं के प्रश्न-पत्रों के पैटर्न में बड़ा बदलाव किया है। अब परीक्षाओं में 50% प्रश्न किताबों के चैप्टर्स से यानी मुख्य विषय वस्तु से पूछे जाएंगे। जोकि सीधे तौर पर बैक एक्सरसाइज से नहीं होंगे। बाकी बचे 50% प्रश्न किताबों के पीछे दिए गए अभ्यास वाले प्रश्न बैंक से ही पूछे जाएंगे। बोर्ड ने यह बदलाव इसलिए किया है ताकि रट्टा मारने के बजाय छात्रों के कॉन्सेप्ट क्लियर हों। सभी स्कूल प्रभारियों और शिक्षकों को निर्देश दिया गया है कि वे इस नए पैटर्न को ध्यान में रखते हुए ही छात्रों को बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी करवाएं। गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल पूनम पुरी का कहना है कि इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि छात्रों में केवल परीक्षा पास करने के लिए रट्टा मारने की पुरानी आदत खत्म होगी, क्योंकि अब प्रश्न सीधे तौर पर किताबों के पीछे के अभ्यास से न आकर पाठ के बीच से भी पूछे जाएंगे। जब छात्र पूरे अध्याय को गहराई से पढ़ेंगे तो उनकी वैचारिक समझ मजबूत होगी, जिससे वे विषय के मूल सिद्धांतों को रटने के बजाय व्यावहारिक रूप से समझ सकेंगे। स्कूल स्तर पर देखें तो इस फैसले से केवल नंबर लाने वाली शिक्षा के बजाय ज्ञान देने वाली शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। शिक्षक भी अब पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ क्लास रूम में चर्चा और नए प्रयोगों के जरिए पढ़ाएंगे, ताकि छात्र हर टॉपिक की गहराई को समझ सकें। लॉग टर्म में यह बदलाव पंजाब के स्कूली छात्रों के बौद्धिक स्तर को राष्ट्रीय स्तर के अन्य बोर्ड के समक्ष खड़ा करने में एक मील का पत्थर साबित होगा। यह बदलाव छात्रों को भविष्य की प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे जेईई, नीट या अन्य प्रवेश परीक्षाओं के लिए मानसिक रूप से तैयार करेगा। जहां कॉन्सेप्ट-आधारित प्रश्न ही पूछे जाते हैं। कुल मिलाकर यह फैसला रटने वाली पढ़ाई को रोककर छात्रों की सोचने-समझने की एनालेटिकल स्किल्स को बढ़ाएगा और उन्हें एक बेहतर शिक्षार्थी बनाएगा। इस बदलाव से न केवल छात्रों के पढ़ने के तरीके में बल्कि पूरी स्कूली शिक्षा व्यवस्था में गहरे और सकारात्मक बदलाव आएंगे। जब परीक्षा में 50% प्रश्न पाठ के अंदर से पूछे जाएंगे तो छात्रों को हर चैप्टर की एक-एक लाइन को ध्यान से पढ़ना होगा। इससे उनकी गंभीर रूप से सोचने की क्षमता यानि क्रिटिकल थिंकिंग और पढ़ने की आदत का विकास होगा। जो आगे चलकर उच्च शिक्षा या कॉलेज की पढ़ाई में मददगार होगी। अक्सर देखा जाता है कि छात्र साल के अंत में केवल गाइड या इंपॉर्टेंट क्वेश्चंस की मदद से परीक्षा की तैयारी कर लेते हैं, लेकिन अब पूरा सिलेबस पढ़े बिना अच्छे अंक लाना नामुमकिन हो जाएगा, जिससे छात्र सालभर नियमित रूप से पढ़ाई करेंगे। नया पैटर्न छात्रों में परीक्षा के डर को भी कम करेगा। जब छात्र किसी विषय के कॉन्सेप्ट को पूरी तरह समझ लेते हैं तो परीक्षा में उन्हें किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होती है।