डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट ने बताया- गैर-शैक्षणिक कामों के कारण सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या 9% तक घटी
- DSS Admin
- Jun 10, 2026
भास्कर न्यूज | जालंधर पंजाब में स्कूलों की पढ़ाई और राज्य की शिक्षा व्यवस्था को लेकर डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट पंजाब की ओर से गंभीर सवाल उठाए गए हैं। यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष दिग्विजयपाल शर्मा और प्रदेश सचिव रेशम सिंह खेमुआणा ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार शिक्षा क्षेत्र में बड़े-बड़े दावे और विज्ञापनों पर करोड़ों खर्च कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि पंजाब के कुल 1,927 सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में से 1,113 स्कूल बिना प्रिंसिपल के राम भरोसे चल रहे हैं। शिक्षक नेताओं ने इसे राज्य के भविष्य के लिए बेहद चिंताजनक स्थिति बताया है। शिक्षक नेताओं ने खुलासा किया कि केवल प्रिंसिपलों के ही नहीं, बल्कि हेडमास्टरों, लेक्चररों, मास्टर कैडर और ईटीटी शिक्षकों के भी बड़ी संख्या में पद खाली पड़े हैं। उनका दावा है कि विभिन्न कैडरों के करीब 60 प्रतिशत पद रिक्त होने के बावजूद सरकार पंजाब को शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में पेश कर रही है, जो वास्तविक स्थिति से कोसों दूर है। जालंधर में भी 70 प्रतिशत स्कूलों में प्रमुख का पद रिक्त यूनियन द्वारा जारी जिलों की आधिकारिक सूची के मुताबिक पंजाब के सरकारी स्कूलों में प्रशासनिक ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है। इसके तहत मानसा और नवांशहर जिलों में प्रिंसिपलों के रिकॉर्ड 86 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं, जिसके कारण यहाँ के सीनियर सेकेंडरी स्कूल बिना किसी स्थायी मुखिया के चल रहे हैं। इसी तरह सीमावर्ती क्षेत्र तरनतारन और बरनाला जिले में भी स्थिति बेहद चिंताजनक है, जहाँ करीब 80 प्रतिशत स्कूलों में प्रिंसिपल का कोई अता-पता नहीं है। इसके अलावा मोगा, कपूरथला और जालंधर जिलों में भी हालात कुछ बेहतर नहीं हैं; यहां भी लगभग 70 प्रतिशत स्कूलों में संस्था प्रमुख का पद रिक्त पड़ा हुआ है, जिससे इन क्षेत्रों की पूरी स्कूली व्यवस्था अतिरिक्त प्रभार के भरोसे चल रही है।

