दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से विधिपुर आश्रम में किया गया आयोजन

भास्कर न्यूज | जालंधर दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा विधिपुर आश्रम में सत्संग समारोह का आयोजन किया गया। इसमें गुरुदेव आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी पल्लवी भारती ने प्रवचनों के माध्यम से इंसान के जीवन में गुरु के महत्व से अवगत करवाया। साध्वी ने बताया कि मनुष्य जन्म ईश्वर की भक्ति के लिए मिला है। भगवान राम गुरु विशिष्ट जी की शरणागत हुए। श्री कृष्ण ने ऋषि दुर्वासा जी से ज्ञान दीक्षा प्राप्त की। न केवल दीक्षा प्राप्त की, बल्कि उत्तम कोटि की गुरुभक्ति भी की। आज हम इन अवतारों को अपना इष्ट मानकर उनकी पूजा करते हैं। पर उनके आचरण से शिक्षा नहीं लेते। इन तीनों लोकों के नायकों ने गुरु का वरण करके समस्त मानव जाति को एक ही वृहद संदेश दिया कि बिना गुरु के मुक्ति संभव नहीं है। साध्वी ने बताया कि जैसे एक मूर्तिकार अनगढ़ पत्थर में से भी एक सुंदर मूर्ति तराश देता है। ऐसी मूर्ति जो पूजनीय बन जाती है। समाज उसके समक्ष नतमस्तक हो उसकी पूजा करता है। यही कार्य गुरु का भी है। गुरु एक सर्वोत्कृष्ट मूर्तिकार है। उसे भी अपने अनगढ़ शिष्य में एक श्रेष्ठ मानव दिखाई पड़ता है। अतः उसे तराशने हेतु वह उन सभी दुर्गुणों को काटता है, छांटता,जो उसकी आकृति को भद्दा बनाए हुए है। जो उसे मानवीय स्तर से च्युत किए हुए हैं। गुरु अपने सधे हुए हाथों से एक ऐसे श्रेष्ठ मानव का निर्माण करता है,जो समस्त समाज के लिए एक आदर्श बन जाता है।