जालंधर| श्री मद् भागवत कथा के छठे दिन पं. बृजकिशोर शरण ने सोमवती अमावस्या का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि इस बार अधिक मास के विश्राम पर सोमवार का योग बन रहा है और इस दिन गंगा में स्नान को विशेष पुण्यकारी माना गया है। उन्होंने पितरों के निमित्त जलदान, नगर या अन्य स्थानों पर मीठे जल की छबील लगाना, लंगर तथा तर्पण को भी पुण्यदायक बताया। कथा में आगे महारास का प्रसंग रखते हुए पंडित बृजकिशोर शरण ने कहा कि जीव और ब्रह्म के मिलन को महारास कहा जाता है। उन्होंने वर्णन किया कि शरद पूर्णिमा की रात यमुना किनारे श्री कृष्ण के मुरली वादन पर वही गोपियां आईं जिन्हें निमंत्रण मिला था। उन्होंने बताया कि पूर्वजन्म में तप करने वाले ऋषि-मुनि गोपी रूप में ब्रज मंडल में आए और भक्ति-रस का पान करने वाली को गोपी कहा जाता है। कथा में यह भी कहा गया कि महारास में शंकर भगवान गोपी बनकर आए तथा रामचरितमानस में हनुमान ने स्वयं को राम की गोपी कहा है। कथा विश्राम पर द्वारिकाधीश और रुक्मणी मंगल महोत्सव धूमधाम से मनाया गया।

