भगवान को चढ़ाए फूलों से धूप-अगरबत्ती और हवन सामग्री बन रही, 3 मंदिरों ने शुरू की कवायद
- Neha Gupta
- Jun 12, 2026
हेमंत | जालंधर श्रद्धा से भगवान के चरणों में अर्पित किए गए फूल जब मुरझा जाते हैं, तो अक्सर वे कचरे का हिस्सा बन जाते हैं या जल स्रोतों में बहा दिए जाते हैं। यह दृश्य कई बार भक्तों के मन को बेचैन कर देता है। इसी भावना को समझते हुए जालंधर के मंदिरों ने एक ऐसी अनोखी पहल शुरू की है, जिसमें आस्था का सम्मान भी है और प्रकृति की सेवा भी। जालंधर के 3 प्रमुख मंदिरों ने मिलकर विशेष कवायद शुरू की है, जिसके तहत भगवान को चढ़ाए गए इन मुरझाए हुए फूलों को फेंकने की बजाय इकट्ठा करके धूप-अगरबत्ती, दिव्य हवन सामग्री और जैविक खाद तैयार की जा रही है। इस मुहिम का मुख्य मकसद यही है कि जो फूल कभी आराध्य का शृंगार बने थे, वे मुरझाने के बाद कचरे के ढेर में जाकर बेकदरी का शिकार न हों, बल्कि दोबारा सुगंध और खाद बनकर प्रकृति व भगवान की सेवा में ही विलीन हो सकें। फूलों से हवन सामग्री बनाने की प्रक्रिया पूरी करते कारीगर। इस मुहिम को धरातल पर उतारने वाले आशीष शर्मा और सुनील शर्मा ने बताया कि श्री बालाजी धाम से हर हफ्ते लगभग 50 से 60 किलो फूल निकलते हैं। इन फूलों की पत्तियों को अलग करके सुखाया जाता है। इसके बाद पूरी वैज्ञानिक और पारंपरिक विधि से इन्हें रीसाइकल करके दिव्य हवन सामग्री और धूपबत्ती का रूप दिया जाता है। इस तरह प्रभु को चढ़ाया गया अंश दोबारा पवित्रता के साथ वातावरण को शुद्ध करने के काम आता है। ^ जिन फूलों से हम अपने आराध्य का हार-शृंगार करते हैं, वह कुछ दिन बाद पैरों में आते थे। इस पर बैठक में बात की और इसकी हवन सामग्री, धूप और अगरबत्ती तैयार करने का फैसला लिया गया। सभी मंदिर प्रबंधक कमेटियों को इस पर विचार करना चाहिए। -सेवादार गौरव थापर, बालाजी धाम (थापरां मोहल्ला)

