जिस हनुमान चालीसा में सदियों पहले पृथ्वी से सूर्य की दूरी बता दी गई, उसीसे जीवन जीने की कला सीख रहे

भास्कर न्यूज | जालंधर हनुमान चालीसा में ‘चालीसा’ शब्द का अर्थ अवधी भाषा में संख्या ‘चालीस’ (40) से है। ऐसा इसलिए है क्योंकि हनुमान चालीसा में मुख्य रूप से 40 चौपाइयां हैं। इनके अतिरिक्त, इसके प्रारंभ में 2 दोहे और अंत में 1 दोहा भी शामिल है। ऐसी ही कुछ आध्यात्मिक और ज्ञान से भरी बातें प्राचीन मंदिर श्री बाबा यशरथ राय जी श्री बालाजी धाम में चल रही सनातन धर्म पाठशाला के दौरान बच्चों को बताई गईं। पाठशाला की शुरुआत प्रतिदिन हनुमान चालीसा के सामूहिक पाठ से की जाती है। मंदिर के मुख्य सेवादार गौरव थापर ने कहा कि धर्म ही जीवन का आधार, शिक्षा से हो संस्कार- इस मूल मंत्र के साथ शुरू हुई यह पाठशाला न केवल किताबी ज्ञान, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने का एक केंद्र बन गई है। मंदिर प्रशासन का मानना है कि आधुनिक युग की भागदौड़ में जब नई पीढ़ी अपनी संस्कृति से दूर हो रही है, तब ऐसे आयोजन एक दिशा-सूचक का कार्य करते हैं। हनुमान चालीसा की चौपाई “जुग सहस्र जोजन पर भानु। लील्यो ताहि मधुर फल जानू।” में पृथ्वी से सूर्य की दूरी का अद्भुत गणित है। प्राचीन गणना के अनुसार- 1 जुग (12,000 वर्ष) 1 सहस्र (1,000) 1 जोजन 8 मील (1 मील 1.6​ किमी.) गणित : 12,000 x 1,000 x 8 = कुल 9 करोड़ 60 लाख मील। किलोमीटर में बदलने पर यह लगभग 15.36 करोड़ किमी होता है, जो आधुनिक विज्ञान (नासा) द्वारा मापी गई प्रामाणिक दूरी के बेहद करीब है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय निवासियों, विशेषकर बच्चों और युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। मंदिर परिसर का वातावरण भजनों और मंत्रों की गूंज से भक्तिमय बना हुआ है। आयोजकों ने बताया कि इस पाठशाला का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि बच्चों के भीतर छिपी जिज्ञासा को शांत करना और उन्हें एक आदर्श नागरिक बनाना है। पाठशाला को लेकर अभिभावक भी खुश हैं। उनका कहना है कि आज के दौर में इंटरनेट और तकनीकी के युग में बच्चों का इन संस्कारों से जुड़ना अत्यंत आवश्यक है। पाठशाला में विद्वानों ने बताया कि हनुमान चालीसा और हनुमान अष्टक केवल स्तुति नहीं, बल्कि साहस, सकारात्मक सोच और अनुशासन सिखाने वाले दिव्य ग्रंथ हैं। इनका पाठ कठिन परिस्थितियों में मानसिक शक्ति व ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास जगाता है। आयोजकों ने बच्चों को इनके भावार्थ समझाए ताकि वे इन संस्कारों को जीवन में उतार सकें। इस दौरान बच्चों ने सामूहिक पाठ कर सनातन परंपराओं व चरित्र निर्माण की जानकारी ली। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ते हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बच्चों, युवाओं और अभिभावकों ने भाग लिया।