पार्क में योग के साथ चला भजनों का दौर, भक्ति की प्रेरक कथाएं सुनाईं

भास्कर न्यूज | जालंधर इन दिनों जालंधर में कृष्ण भक्ति की एक अनोखी लहर चल रही है। ठाकुर जी की असीम कृपा से युवाओं के भीतर अध्यात्म की अलख जगाने का यह पावन कार्य कथाव्यास पूज्य अंगद प्रभु जी कर रहे हैं। पिछले दिनों एक भव्य श्रीमद्भागवत कथा के गायन के दौरान उनके मन में विचार आया कि ईश्वर की भक्ति और यह दिव्य ज्ञान सिर्फ सात दिनों और एक निश्चित स्थान तक ही सीमित क्यों रहे? इसका प्रसार तो बच्चे-बच्चे और जन-जन तक होना चाहिए। इसी पवित्र उद्देश्य के साथ अंगद प्रभु जी ने ‘भक्ति सत्र’ नामक एक अनूठी मुहिम की शुरुआत की है। आदर्श नगर पार्क में सुबह योग के साथ भक्ति सत्र का आयोजन किया गया। आज के इस आधुनिक दौर में लोग सुबह उठकर शरीर को स्वस्थ रखने के लिए कसरत और व्यायाम तो करते हैं, लेकिन मानसिक और आत्मिक स्वास्थ्य पर किसी का ध्यान नहीं जाता। यही वजह है कि समाज में डिप्रेशन, स्ट्रेस और एंग्जाइटी जैसी मानसिक बीमारियां तेजी से पैर पसार रही हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति युवा पीढ़ी की है, जो शारीरिक स्वास्थ्य को भुलाकर मोबाइल फोन की आभासी दुनिया को ही अपनी हकीकत मान चुकी है। ऐसे समय में युवाओं को योग से जोड़ने और उनके मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने के लिए योग को मनोरंजक व आध्यात्मिक बनाना बेहद जरूरी हो गया है। इसी श्रृंखला के तहत आगामी रविवार 14 जून को सुबह ठीक 6 बजे आदर्श नगर चौपाटी स्थित आदर्श नगर के बड़े पार्क में एक भव्य ‘भक्ति सत्र’ का आयोजन होने जा रहा है। इस आयोजन में शामिल होने वाले सभी भक्तों से अनुरोध किया गया है कि वे अपने साथ बैठने के लिए एक आसन और पानी की बोतल जरूर लेकर आएं। आयोजकों ने जालंधरवासियों से अपील की है कि वे रविवार की सुबह इस पावन सत्र का हिस्सा बनें, ताकि कीर्तन के माध्यम से मन को प्रभु चरणों में लगाया जा सके और सुबह की शुद्ध, पवित्र वायु से अपने शरीर व आत्मा को पूर्णतः स्वस्थ बनाया जा सके। भक्ति सत्र इसी दिशा में एक क्रांतिकारी प्रयास है। सुबह के शांत और पवित्र वातावरण में यहां योग के साथ-साथ प्रभु नाम का संकीर्तन होता है, जो साधकों को एक बिल्कुल अलग और अलौकिक आनंद का अनुभव कराता है। इस सत्र में गुरबानी, भागवत पुराण सहित अन्य पवित्र ग्रंथों में वर्णित प्रभु के परम भक्तों की प्रेरक कथाएं सुनाई जाती हैं। इन पावन कथाओं से सीख लेकर भक्त अपने मन को इस भागदौड़ और कष्टों से भरी दुनिया से दूर कर, आध्यात्मिक परमानंद की ओर ले जाते हैं, जिससे मानसिक शांति का अहसास होता है।