पूर्व विधायक भैणी का 16 जनवरी को होगा अंतिम संस्कार:लुधियाना में 12 जनवरी को हुआ था निधन, लंबी बीमारी से जूझ रहे थे
- Admin Admin
- Jan 14, 2026
लुधियाना जिले के वरिष्ठ नेता और दो बार के पूर्व विधायक सरदार गुरदीप सिंह भैणी का 12 जनवरी की सुबह निधन हो गया था। वे लगभग 92 वर्ष के थे और कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनका अंतिम संस्कार 16 जनवरी को दोपहर 1 बजे उनके पैतृक गांव भैणी आरिया में किया जाएगा। पूर्व विधायक के निधन पर जगराओं, दाखा और सिधवां बेट क्षेत्र सहित राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक व्यक्त किया गया। परिजनों ने बताया कि हाल ही में सरदार भैणी का घुटने का ऑपरेशन हुआ था, जिसके बाद उन्होंने चलना-फिरना शुरू कर दिया था। 12 जनवरी को हुआ निधन हालांकि, बढ़ती उम्र के कारण उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता गया। लोहड़ी से एक दिन पहले, 12 जनवरी की सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। परिवार के कुछ सदस्यों के विदेश में होने के कारण अंतिम संस्कार की तिथि 16 जनवरी निर्धारित की गई है। मेहनत, ईमानदारी से बनाई पहचान बता दे कि सरदार गुरदीप सिंह भैणी का जन्म वर्ष 1934 में हरनाम सिंह तूर और बचन कौर के घर हुआ था। देश के बंटवारे के बाद उनका परिवार पाकिस्तान से भारत आकर सिधवां बेट क्षेत्र के पास गांव भैणी अरायां में बस गया। सीमित संसाधनों के बावजूद, उन्होंने अपनी मेहनत, ईमानदारी और संघर्ष से समाज में अपनी एक अलग पहचान बनाई। इच्छाशक्ति और जमीन से जुड़े व्यक्तित्व का रहे प्रतीक सरदार गुरदीप सिंह भैणी प्रारंभिक जीवन में खेती-बाड़ी से जुड़े रहे और बाद में पटवारी के रूप में सरकारी सेवा में शामिल हुए। अपनी सादगीपूर्ण जीवनशैली के लिए पहचाने जाने वाले सरदार भैणी अक्सर साइकिल पर भैणी साहिब जाया करते थे। यह उनकी मजबूत इच्छाशक्ति और जमीन से जुड़े व्यक्तित्व का प्रतीक था। अकाली फिर कांग्रेस से लड़ा चुनाव राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते हुए, उन्होंने वर्ष 1985 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा और शिरोमणि अकाली दल से विधायक चुने गए। सुरजीत सिंह बरनाला की सरकार के कार्यकाल में उन्हें टीयूवी कॉर्पोरेशन का चेयरमैन नियुक्त किया गया था।उनके राजनीतिक जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ 2007 में आया, जब उन्होंने कांग्रेस पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा। जनाधार और विरासत इस चुनाव में उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी भाग सिंह मल्ला को हराकर जीत दर्ज की। सरदार भैणी अकाली दल और कांग्रेस दोनों ही दलों में रहते हुए क्षेत्र की आवाज को मजबूती से उठाने के लिए जाने जाते थे।सरदार गुरदीप सिंह भैणी जगराओं और दाखा विधानसभा क्षेत्रों में मजबूत जनाधार रखने वाले नेता थे। सरपंच पद पर सबसे लंबा कार्यकाल उनके परिवार का गांव में सरपंच पद पर सबसे लंबा कार्यकाल रहा, जो जनता के भरोसे और उनके प्रभाव को दर्शाता है।उनके परिवार में दो बेटे हैं इनमें मेजर सिंह भैणी, जो कांग्रेस पार्टी से सक्रिय राजनीति में हैं और दाखा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ चुके हैं। जमीन से जुड़े सच्चे राजनेता का अंत जबकि सुखदेव सिंह तूर, जो कनाडा में प्रतिष्ठित व्यवसायी हैं।सरदार गुरदीप सिंह भैणी का जीवन संघर्ष, सादगी और जनसेवा का प्रतीक रहा। उनके निधन से न केवल उनके परिवार, बल्कि जगराओं, दाखा और सिधवां बेट क्षेत्र ने एक अनुभवी मार्गदर्शक, जननेता और जमीन से जुड़े सच्चे राजनेता को खो दिया है



