सनातन परंपरा में अमावस्या का विशेष महत्व: संत अश्वनी बेदी

लुधियाना| श्री राम शरणम, सिविल लाइंस में संत अश्वनी बेदी ने सोमवती अमावस्या के महत्व पर संदेश देते हुए कहा कि सनातन परंपरा में अमावस्या का विशेष स्थान है और सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को दुर्लभ व अत्यंत पवित्र संयोग माना जाता है। उन्होंने बताया कि आज संक्रांति के साथ आषाढ़ माह का आरंभ भी हो रहा है। संत अश्वनी बेदी के अनुसार सोमवार भगवान शिव को समर्पित है, जबकि अमावस्या पितरों से जुड़ी मानी जाती है, इसलिए इस दिन शिव और पितरों की कृपा एक साथ प्राप्त करने का अवसर रहता है। उन्होंने गंगा, यमुना सहित पवित्र नदियों में स्नान की पारंपरिक मान्यता का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे पापों के शमन से जोड़ा जाता है। उन्होंने कहा कि अमावस्या पर तर्पण, पिंडदान और दान को पितृ दोष निवारण से संबंधित माना जाता है। शिव-पार्वती की संयुक्त पूजा, पीपल पूजन और विवाहित स्त्रियों द्वारा रखे जाने वाले व्रत की परंपरा का भी उन्होंने उल्लेख किया। साथ ही उन्होंने बताया कि चंद्रमा से जुड़े मनोवैज्ञानिक पक्ष के कारण व्रत, मौन और ध्यान को मन की शांति व संतुलन में सहायक माना जाता है।