एसएस जैन सभा और श्री महावीर जैन युवक मंडल के आयोजन में जुटे श्रद्धालु, शिक्षिकाओं के समर्पण की सराहना

भास्कर न्यूज | लुधियाना हैबोवाल स्थित जैन स्थानक में रविवार को नवकार महामंत्र का सामूहिक जाप करवाया गया। एसएस जैन सभा हैबोवाल के तत्वावधान और श्री महावीर जैन युवक मंडल हैबोवाल की ओर से आयोजित इस धार्मिक समागम में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता की। सभी श्रद्धालुओं ने एकाग्रचित्त होकर पंच परमेष्ठी भगवान की वंदना की और जाप कर धर्मलाभ उठाया। समागम में उपस्थित समाजजनों ने जिनशासन की उन्नति और विश्व कल्याण की मंगलकामना की। इस दौरान नई पीढ़ी को नैतिक मूल्यों से जोड़ने के लिए आयोजित जैन संस्कार शिविर 2026 के प्रतिभावान बच्चों को सम्मानित किया गया। शिविर में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले, अनुशासित रहने वाले और सक्रिय सहभागिता निभाने वाले बच्चों को विशेष पुरस्कृत किया गया। ब्राह्मी जैन युवती मंडल की चेयरमैन मनु जैन, अध्यक्ष ममता जैन, सेक्रेटरी निशिका जैन, रीना जैन, दिशा जैन, ममता जैन, रुचि जैन, भावना जैन और शीना जैन ने बच्चों को जैन धर्म, प्रार्थना, नैतिक शिक्षा और व्यक्तित्व विकास से संबंधित विषयों का प्रशिक्षण दिया। इस दौरान अल्पाहार की व्यवस्था की गई थी। एसएस जैन सभा के संरक्षक कपिल जैन, चेयरमैन सुरिंदर मोहन जैन, प्रधान पंकज जैन, महासचिव राजीव जैन और कोषाध्यक्ष प्रवीन जैन मुख्य रूप से उपस्थित रहे। श्री महावीर जैन युवक मंडल के संरक्षक पुनीत जैन, प्रधान भूपेश जैन, महासचिव डॉ. दीपक जैन, कोषाध्यक्ष देवांश जैन और उपप्रधान रजत जैन ने सहयोगी संस्थाओं श्री पार्वती जैन महिला मंडल, श्री ब्राह्मी जैन युवती मंडल और श्री सुन्दरी जैन युवती मंडल, हैबोवाल और सभी श्रद्धालुओं का धन्यवाद किया। बच्चों को पुरस्कार देकर सम्मानित करते सदस्य। बच्चों को मोबाइल से दूर कर अच्छे संस्कारों से जोड़ने का बड़ा प्रयास समागम में सबसे खास और सराहनीय प्रयास जैन संस्कार शिविर 2026 के रूप में देखने को मिला। आज के आधुनिक दौर में जब बच्चे ज्यादातर समय मोबाइल और गैजेट्स में व्यस्त रहते हैं ऐसे में जैन समाज के इस विशेष शिविर ने बच्चों को अपनी जड़ों और संस्कृति से जोड़ने का एक बड़ा काम किया है। शिक्षिकाओं की टीम ने अत्यंत सरल और व्यावहारिक पद्धतियों के माध्यम से बच्चों को न केवल धर्म के मूल सिद्धांत सिखाए बल्कि दैनिक जीवन में काम आने वाली अच्छी आदतें और नैतिक शिक्षा के गुर भी दिए। समाज के प्रबुद्ध जनों का मानना है कि बचपन में बोए गए ये नैतिक मूल्य आगे चलकर एक सुसंस्कृत समाज के निर्माण में मील का पत्थर साबित होंगे। यही कारण रहा कि इस अनूठे प्रयास की पूरे समागम के दौरान विशेष रूप से सराहना हुई।