पार्किंग टेंडरों की शर्तें बताए बिना मंजूरी, स्वीमिंग पूल मेंटेनेंस के 1 की जगह दो प्रस्ताव
- Neha Gupta
- Jun 16, 2026
नगर निगम में नए कमिश्नर ओजस्वी अलंकार ने सोमवार दोपहर करीब 1:30 बजे पदभार संभाला और महज दो घंटे बाद मेयर इंद्रजीत कौर ने कैंप ऑफिस में एफएंडसीसी की बैठक बुला ली। बैठक में 400 से अधिक प्रस्तावों वाला भारी-भरकम एजेंडा रख दिया गया, जबकि कमेटी सदस्यों को एजेंडा बैठक से केवल ढाई घंटे पहले ही उपलब्ध कराया गया था। नियमों के अनुसार एफएंडसीसी का एजेंडा बैठक से कम से कम एक या दो दिन पहले सदस्यों को भेजा जाना चाहिए ताकि प्रस्तावों का अध्ययन किया जा सके। लेकिन, सीनियर डिप्टी मेयर राकेश पराशर को दोपहर करीब 1 बजे एजेंडा मिला और करीब ढाई घंटे बाद बैठक शुरू हो गई। पराशर ने बैठक में इसका विरोध करते हुए कहा कि इतने महत्वपूर्ण प्रस्तावों को बिना अध्ययन के पास करना उचित नहीं है। इसी वजह से 400 से अधिक एजेंडे में से केवल करीब 80 प्रस्तावों पर ही चर्चा हो सकी। इनमें से दो प्रस्तावों को सीधे रद्द कर दिया गया, जबकि कई को लंबित रखा गया। बैठक में मेयर इंद्रजीत कौर, निगम कमिश्नर ओजस्वी अलंकर, सीनियर डिप्टी मेयर राकेश पराशर, डिप्टी मेयर प्रिंस जौहर समेत निगम के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में खुली गड़बड़ी:4 साल से पार्किंग साइटें एक ही ठेकेदार के पास पार्किंग के प्रस्ताव पर उठे सवाल: बैठक का सबसे चौंकाने वाला मामला शहर की छह प्रमुख पार्किंग साइटों को ई-टेंडर-कम-ई-ऑक्शन के जरिए अलॉट करने से जुड़ा रहा। निगम प्रशासन संशोधित शर्तों का ड्राफ्ट मंजूरी के लिए लेकर आया, लेकिन प्रस्ताव में यह स्पष्ट ही नहीं किया गया कि पुरानी शर्तों में क्या बदलाव किए गए हैं और नई शर्तें क्या हैं। इसके बावजूद प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। सूत्रों के अनुसार पिछले करीब चार वर्षों से एक ही ठेकेदार को लगातार एक्सटेंशन देकर पार्किंग का काम दिया जा रहा है। स्वीमिंग पूल मेंटेनेंस के दो प्रस्ताव को तकनीकि त्रुटि बताया: बैठक में रखबाग स्थित स्वीमिंग पूल के रखरखाव से जुड़ी एक गंभीर गड़बड़ी भी सामने आई। ओएंडएम ब्रांच की ओर से एक ही काम के लिए दो अलग-अलग प्रस्ताव और दो फाइलें मंजूरी के लिए रख दी गईं। दोनों फाइलों में करीब 13-13 लाख के मेंटेनेंस कार्य का प्रस्ताव था। इसे लेकर लंबी बहस हुई। हालांकि अधिकारियों की ओर से इसे तकनीकी त्रुटि बताने की कोशिश की गई। विधायक के फोन पर रद्द प्रस्तावों को मिली मंजूरी: बैठक के दौरान अवैध इमारतों का मुद्दा भी गरमाया। डिप्टी मेयर प्रिंस जौहर और सीनियर डिप्टी मेयर राकेश पराशर ने मेयर से जवाब मांगा कि पिछली बैठक में जिन तीन प्रस्तावों को रद्द कर दिया गया था, वे बाद में कैसे मंजूर हो गए। चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि एक विधायक के मेयर को आए फोन के बाद उन प्रस्तावों को मंजूरी दी गई थी। इस पर दोनों कमेटी सदस्यों ने कड़ा एतराज जताते हुए कहा कि यदि कोई निर्णय बदला गया था तो कमेटी के अन्य सदस्यों को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई। 1.64 करोड़ का सीवरेज मॉनिटरिंग प्रोजेक्ट मंजूर: बैठक में कई विकास कार्यों को भी मंजूरी दी गई। ओल्ड जीटी रोड (घंटाघर से जगराओं पुल) के सौंदर्यीकरण और नवीनीकरण का कार्य 1.32 करोड़ में आवंटित करने का फैसला लिया गया। वहीं शहर के सभी डिस्पोजल पॉइंट्स पर अल्ट्रासोनिक लेवल ट्रांसमीटर और सेंसर लगाने के 1.64 करोड़ के प्रोजेक्ट को भी मंजूरी दी गई। इससे सीवरेज ओवरफ्लो और जलस्तर की रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव हो सकेगी।इसके अलावा 19 डीसी रेट ड्राइवरों की सेवाएं बढ़ाने, 8 जूनियर ड्राफ्ट्समैन का कार्यकाल एक वर्ष के लिए बढ़ाने और डॉग बाइट तथा आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए रिटायर्ड सीनियर वेटरनरी अफसर डॉ. आदित्य सेवक को अनुबंध पर नियुक्त करने के प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई। इन प्रस्तावों पर लगी रोक कैंप ऑफिस में एफएंडसीसी की मीटिंग के दौरान मेयर व अन्य अधिकारी। अतिरिक्त प्रभार बांटने पर भी सवाल: बैठक में सीनियर डिप्टी मेयर राकेश पराशर ने निगम में अतिरिक्त प्रभार देकर की गईं नियुक्तियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जैसे बिल्डिंग ब्रांच में इंस्पेक्टर को एटीपी का चार्ज देना गलत था, वैसे ही तहबाजारी शाखा में क्लर्कों को अवैध रूप से इंस्पेक्टर का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। दो भाइयों की कंपनी ने भाग लिया: वार्ड-41 के लिए पानी के टैंकर की खरीद का प्रस्ताव रद्द कर दिया गया क्योंकि टेंडर प्रक्रिया में एक ही परिवार के दो भाइयों की कंपनियों ने भाग लिया था। वहीं बुड्ढा दरिया किनारे गमले और बेंच लगाने, कम्युनिटी सेंटरों के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति जैसे प्रस्तावों को फिलहाल लंबित रखा गया।

