भास्कर न्यूज| लुधियाना सनातन धर्म के पंचांग में जब विशेष पुण्यकाल के दौरान एकादशी, प्रदोष, शिव चतुर्दशी, श्राद्ध अमावस्या और सोमवती अमावस्या एक साथ एक ही क्रम में आती हैं तो वह पूरा समय सिद्ध काल बन जाता है। कल यानी 11 जून से 15 जून तक आकाश मंडल में सूर्य और चंद्रमा की ऐसी स्थिति बन रही है जहां मनुष्य का मन और आत्मा सीधे पूर्वजों और ईश्वरीय सत्ता से सकारात्मक ऊर्जा ग्रहण कर सकेंगे। पंडित गोपाल शास्त्री के अनुसार, शास्त्रों में पुरुषोत्तम मास को कल्पवृक्ष के समान माना गया है जो सभी अभीष्ट मनोरथों को पूर्ण करता है। इस मास के अंत में या कृष्ण पक्ष की अष्टमी, नवमी व चतुर्दशी को कांसे के पात्र में सूत लपेटे हुए 30 मालपुए रखकर ब्राह्मण को दान देकर उद्यापन करने से व्रत पूर्ण होता है। सामर्थ्य होने पर वेदपाठी ब्राह्मण को 30 संपुट दान करने का भी विधान है। ज्योतिष विज्ञान पुरुषार्थ चिंतामणि के अनुसार, इस बार अमावस्या दो दिनों तक रहने से 15 जून को पुष्कर योग (सोमवती अमावस्या) का दुर्लभ संयोग बन रहा है जिसमें किए गए दान-पुण्य का फल सूर्य ग्रहण से भी सौ गुना अधिक मिलता है और वर्षों पुराने पितृ दोष, गृह-क्लेश, संतान व विवाह संबंधी कष्ट जड़ से समाप्त हो जाते हैं। 12 व 13 जून: प्रदोष व्रत और शिव चतुर्दशी * धार्मिक महत्व: 12 जून को प्रदोष व्रत और 13 जून को शिव चतुर्दशी (मासिक शिवरात्रि) का महासंयोग है। यह शिव -शक्ति के मिलन का प्रतीक है जिससे अकाल मृत्यु का भय टलता है कुंडली के गंभीर ग्रह दोष शांत होते हैं। * विशेष अर्पण: शिवलिंग पर तांबे के पात्र से शुद्ध जल, कच्चा दूध, दही, शहद, बेलपत्र, धतूरा और सफेद चंदन अर्पित करें। * दान सामग्री: शुद्ध घी, कपूर, चीनी या गाय के दूध का दान सर्वश्रेष्ठ है। * सटीक उपाय: 21 बेलपत्रों पर सफेद चंदन से राम लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। महामृत्युंजय जप करें। इससे मानसिक तनाव दूर होता है। 14 जून: कृष्ण पक्ष की श्राद्ध अमावस (पितृ ऋण से मुक्ति ) * धार्मिक महत्व: जब सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि में बेहद करीब होते हैं तब पितृ लोक का द्वार पृथ्वी के सबसे निकट होता है। इस दिन तर्पण और भगवद गीता के सातवें अध्याय का पाठ करने से पूर्वजों को मोक्ष मिलता है और वंश वृद्धि होती है। * विशेष अर्पण: दोपहर में दक्षिण दिशा की ओर मुख करके कुशा, जौ और काले तिल के साथ पितरों को तर्पण दें। * दान सामग्री: काले तिल, जौ, जल से भरा मिट्टी का घड़ा, छाता और वस्त्र दान करें। * सटीक उपाय: सात्विक भोजन की पहली रोटी के तीन हिस्से कर गाय, कौवे और काले कुत्ते को दें। शाम को घर की दक्षिण दिशा में तिल के तेल का दीपक जलाएं। 15 जून: सोमवती अमावस्या (अश्वमेध यज्ञ फल योग) * धार्मिक महत्व: अमावस्या का विस्तार दो दिनों तक रहने से 15 जून को सोमवती अमावस्या का परम दुर्लभ योग बन रहा है। स्कन्द पुराण के अनुसार, सोमेश्वर महादेव की पूजा-अर्चना करने से करोड़ यज्ञों व हजारों अश्वमेध यज्ञों के समान पुण्य मिल ता है । वैवाहिक व संतान कष्ट दूर होते हैं। * विशेष अर्पण: सुबह मौन रहकर स्नान करें। शिव-पार्वती की संयुक्त पूजा करें और विवाहित महिलाएं माता पार्वती को सिंदूर व सुहाग सामग्री अर्पित करें। * दान सामग्री: सुहाग सामग्री, कपूर, अन्न दान और गौ माता को हरा चारा दें। * सटीक उपाय: पीपल की जड़ में कच्चा दूध , जल चढ़ाकर वृक्ष पर सफेद सूती धागा या कलावा लपेटते हुए 108 बार परिक्रमा करें। 11 जून: परमा एकादशी (दरिद्रता नाशक दिन) * धार्मिक महत्व: कृष्ण पक्ष की इस एकादशी को पुरुषोत्तमी या कमला एकादशी भी कहा जाता है जिसमें शोभन योग बन रहा है। इसी व्रत के प्रभाव से कुबेर देव को अपनी खोई हुई अमर निधि वापस मिली थी। लक्ष्मी-नारायण के पूजन से आर्थिक संकट दूर होता है। * विशेष अर्पण: भगवान विष्णु को पीले फल, चने की दाल, पीले फूल और तुलसी दल अर्पित करें। * दान सामग्री: पीला अनाज, केले, धार्मिक पुस्तकें, पीले वस्त्र दान करें। * सटीक उपाय: शाम के समय तुलसी के पास गाय के घी का दीपक जलाएं और ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें। इससे कर्ज से मुक्ति मिलती है।

