तरनतारन में पहलवान जस्सा पट्टी ने कुश्ती से संन्यास लिया:हिंद केसरी और भारत केसरी का जीत चुके खिताब, पिता ने सिखाए थे गुर
- Admin Admin
- Jan 21, 2026
तरनतारन जिले के मशहूर पहलवान जस्सा पट्टी ने कुश्ती की दुनिया से संन्यास ले लिया है। तरनतारन जिले के गांव चुसलेवाड़ के रहने वाले जस्सा पट्टी ने 13 साल की उम्र में अपने पिता सलविंदर सिंह शिंदा को गुरु मानकर मिट्टी के अखाड़े में कदम रखा था। 16 साल की उम्र तक वह कुश्ती में पूरी तरह माहिर हो गए थे। अपने करियर के दौरान, जस्सा पट्टी को कई शारीरिक चोटें लगीं, जिसके लिए डॉक्टरों ने भी कई बार जवाब दे दिया था। उनके पिता सलविंदर सिंह शिंदा ने उन्हें सफल बनाने के लिए कई बार कर्ज भी लिया। पिता के आशीर्वाद और अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण जस्सा पट्टी ने कभी हार नहीं मानी। नामी पहलवानों को दी चुनौती उन्होंने देश भर के अखाड़ों में कई नामी पहलवानों को चुनौती दी और कई बार हिंद केसरी तथा भारत केसरी जैसे प्रतिष्ठित खिताब जीते।जस्सा पट्टी का विवाह गांव टोला नंगल की मंदीप कौर से हुआ है, जो स्वयं पांच बार एशिया वर्ल्ड कप खेल चुकी हैं और एशिया गोमा की कप्तानी भी कर चुकी हैं। कुश्ती के अखाड़े को कहा अलविदा बता दे कि यह जोड़ी कुश्ती के खेल के प्रति पूरी तरह समर्पित रही है। उनके परिवार में एक बेटी सदा कौर और चार महीने का बेटा निधान सिंह हैं।जस्सा पट्टी ने बताया कि उन्होंने यह फैसला अपने परिवार और दोस्तों से सलाह करने के बाद लिया है। उन्होंने अपनी इच्छा से कुश्ती के अखाड़े को अलविदा कहने का निर्णय लिया है। पिता भी थे नामी पहलवान जस्सा पट्टी के पिता, पहलवान सलविंदर सिंह शिंदा चुसलेवर, 1971 में सेना में शामिल हुए थे। उन्होंने 19 बार इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड ऑल इंडिया गेम्स में हिस्सा लिया और सात बार पंजाब केसरी और रुस्तम-ए-हिंद जैसे खिताब अपने नाम किए। जस्सा पट्टी ने अपने जीवन में मिली सफलता के लिए अपने पिता पहलवान सलविंदर सिंह शिंदा और मां परमिंदर कौर के प्रति आभार व्यक्त किया है।



