हरियाणा में 22 जिला अटॉर्नी प्रमोशन विवाद हाईकोर्ट पहुंचा:सरकार को नोटिस भेजकर जवाब मांगा; याचिका में BNSS की धारा का उल्लंघन बताया

हरियाणा सरकार के 22 जिला अटॉर्नी विवाद का मामला पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है। हाईकोर्ट के वकील प्रदीप कुमार रापड़िया ने इस मामले में एक याचिका दाखिल की है, जिस पर आज सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने इस मामले में हरियाणा सरकार को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता वकील ने बताया कि सरकार द्वारा बनाए गए भेदभावपूर्ण नियमों के कारण एक आम वकील के संवैधानिक एवं वैधानिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है। BNSS में स्पष्ट रूप से प्रावधान है कि 15 वर्षों का अनुभव रखने वाला कोई भी वकील डिप्टी डायरेक्टर ऑफ प्रॉसीक्यूशन बनने के लिए पात्र है। इसके बावजूद हरियाणा सरकार ने ऐसा नियम बना दिया है, जिसके अंतर्गत केवल सरकारी वकील के रूप में कार्यरत व्यक्तियों को ही पदोन्नति के माध्यम से डिप्टी डायरेक्टर ऑफ प्रॉसीक्यूशन बनाए जाने का प्रावधान किया गया है, जो स्पष्ट रूप से भेदभावपूर्ण और कानून के विरुद्ध है। बता दें कि इस मामले में एक अन्य वकील हेमंत कुमार ने भी सरकार को नोटिस भेज कर कार्रवाई की मांग की है। अब जानिए क्या है पूरा मामला हरियाणा सरकार के गृह विभाग ने करीब 16 दिन पहले एक आदेश जारी किया, जिसमें सूबे के डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी (DA) पद पर कार्यरत 22 जिलों के अधिकारियों को एक स्तर ऊपर असिस्टेंट डायरेक्टर ऑफ प्रॉसीक्यूशन (ADP) बनाने के बजाय, सीधे दो स्तर ऊपर डिप्टी डायरेक्टर ऑफ प्रॉसीक्यूशन (DDP) के पद पर पदोन्नत कर दिया है। प्रमोशन वरिष्ठता के आधार पर किए गए हैं। सभी प्रमोट किए गए अधिकारी एक वर्ष की परिवीक्षा (प्रोबेशन) अवधि पर रहेंगे। डिप्टी डायरेक्टर बनाए गए। इन 22 जिला अटॉर्नी को मिला डबल प्रमोशन डिप्टी डायरेक्टर ऑफ प्रॉसीक्यूशन बनाए गए जिला अटॉर्नी- सुमन बंसल, सोहन सिंह, लेघा दीपक रणजीत, सतीश कुमार, आनंद मान, सुनील कुमार, सत्येंद्र कुमार, राजेश कुमार चौधरी, धर्मेंद्र राणा, मनोज कुमार, दीपक बूरा, हरपाल सिंह, अनीता, राजेश कुमार, परवेज, सुमेर सिंह, हितेंद्र सिंह, नरेंद्र सिंह, मंजीत सिंह, अश्वनी कुमार चौधरी, सुरेश कुमार और पारुल चौहान का नाम शामिल है। यहां देखिए सरकार के प्रमोशन ऑर्डर की कॉपी... वेतन में कितनी बढ़ोतरी हुई? पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट और प्रशासनिक मामलों के जानकार हेमंत कुमार के मुताबिक, 31 दिसंबर के आदेश में DDP का वेतनमान ₹1,23,100 से ₹2,15,900 दर्शाया गया है, जो कि डायरेक्टर ऑफ प्रॉसीक्यूशन से भी अधिक है। इस कथित विसंगति को लेकर उन्होंने 12 जनवरी को गृह विभाग की ACS डॉ. सुमिता मिश्रा को पत्र लिखकर मामला संज्ञान में लाया है। BNSS 2023 के उल्लंघन का दावा एडवोकेट हेमंत कुमार ने इस प्रमोशन को लेकर हरियाणा सरकार को कानूनी नोटिस भेजा है। उनका कहना है कि यह फैसला भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 का उल्लंघन है। BNSS की धारा 20(2)(a) के अनुसार, डिप्टी डायरेक्टर ऑफ प्रॉसीक्यूशन वही व्यक्ति बन सकता है, जो कम से कम 15 साल से वकालत कर रहा हो, या सेवारत/पूर्व सेशन जज हो।उनका आरोप है कि सीधे प्रमोशन देकर 15 साल या उससे अधिक अनुभव वाले प्राइवेट वकीलों को प्रतिस्पर्धा का मौका ही नहीं दिया गया। नियम बदले, लेकिन सीधी भर्ती का रास्ता बंद हेमंत कुमार के अनुसार, 18 दिसंबर 2025 को गृह विभाग ने हरियाणा राज्य अभियोजन विभाग विधिक सेवा (ग्रुप-A) नियमावली 2013 में संशोधन किया। इसमें ADP और DDP के पद जोड़े गए। संशोधन में कहा गया है कि DDP बनने के लिए 2 साल ADP के रूप में अनुभव जरूरी है, लेकिन पहले ADP का पद ही मौजूद नहीं था, इसलिए DA से सीधे प्रमोशन का रास्ता खोल दिया गया। हालांकि, 15 साल की प्राइवेट प्रैक्टिस वाले वकीलों और सेशंस जजों से सीधी भर्ती का कोई प्रावधान नहीं किया गया।