हरियाणा के 46 शहरों में घर खरीदना महंगा:EDC में 10% की बढ़ोतरी, 1 जनवरी से दरें लागू; गुरुग्राम-फरीदाबाद में अधिक असर
- Admin Admin
- Jan 16, 2026
हरियाणा में घर खरीदने की योजना बना रहे लोगों को झटका लगा है। सरकार ने प्रदेश के 46 शहरों में EDC (बाह्य विकास शुल्क) में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है। संशोधित दरें 1 जनवरी 2026 से ही लागू मानी जाएंगी। बढ़ी हुई फीस होम, इंडस्ट्रियल, कॉमर्शियल और कंबाइन यूज वाले सभी प्रोजेक्ट पर लागू होगी। इसका सीधा असर प्रॉपर्टी की कीमतों पर भी पड़ेगा। खासकर NCR के गुरुग्राम, फरीदाबाद और पंचकूला जैसे हाई डिमांड वाले शहरों में लोगों पर अधिक बोझ पड़ेगा। सर्कल रेट के बाद EDC से बढ़ेगा बोझ EDC वह फीस है, जो राज्य सरकार डेवलपर्स से प्रोजेक्ट क्षेत्र में बनने वाले बुनियादी ढांचों के लिए लेती है। इसमें सड़कें, जल आपूर्ति, बिजली और सीवरेज नेटवर्क शामिल होता है। आमतौर बिल्डर इस अतिरिक्त लागत को कस्टमर और निवेशकों पर डाल देते हैं। हाल ही में सर्कल रेट में भी बढ़ोतरी हुई थी। इसके बाद अब EDC बढ़ने से प्रदेश में रेसीडेंशियल और कॉमर्शियल प्रॉपर्टीज के महंगी होने की संभावना है। अब पढ़िए ईडीसी बढ़ने से क्या होगा असर... मध्यम क्षमता वाले शहरों में 82 लाख रुपए प्रति एकड़ EDC मध्यम पोटेंशियल जोन में आने वाले अंबाला, कुरुक्षेत्र, बहादुरगढ़, हिसार, रोहतक, रेवाड़ी, बावल, पलवल, यमुनानगर, धारूहेरा, पृथला, गन्नौर और होडल जैसे शहरों में भी इसका असर दिखेगा। यहां EDC निम्न प्रकार से रहेगी। इन इलाकों में प्लॉटेड कॉलोनियों के लिए EDC 82 लाख रुपए प्रति एकड़ होगी, ग्रुप हाउसिंग में 400 PPA पर 3.29 करोड़ रुपए प्रति एकड़ और 300 PPA पर 2.47 करोड़ रुपए प्रति एकड़ रहेगी। खरीदारों और निवेशकों पर पड़ेगा सीधा असर रियल एस्टेट विशेषज्ञों के मुताबिक, EDC में बढ़ोतरी का सीधा असर फ्लैट, प्लॉट और कॉमर्शियल प्रॉपर्टी की कीमतों पर पड़ेगा। NCR में पहले से ऊंचे दामों के बीच यह फैसला घर खरीदने वालों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल सकता है, जबकि डेवलपर्स आने वाले प्रोजेक्ट्स में कीमतें और बढ़ सकती हैं। हर साल 10 फीसदी बढ़ोतरी होगी भविष्य में EDC दरों को निर्धारित करने के लिए एक सलाहकार को नियुक्त किया जाएगा। जब तक EDC दरें निर्धारित नहीं हो जातीं, तब तक हर साल एक अप्रैल से 10 प्रतिशत ईयरली इंक्रीमेंट होता रहेगा। इससे पहले वित्त मंत्री, लोक निर्माण मंत्री, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री और स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री की मंत्रिमंडलीय उपसमिति की सिफारिशों पर इंडेक्सेशन मैकेनिज्म के तहत EDC की दरें तय की गई थीं। 2018 में सरकार ने गुरुग्राम और रोहतक सर्किल की EDC दरों के निर्धारण का कार्य आईआईटी दिल्ली और रुड़की को सौंपा था। दोनों संस्थानों ने EDC दरों के निर्धारण का कार्य करने से इनकार कर दिया था, जिसके कारण आज तक वही इंडेक्सेशन नीति और EDC दरें जारी रहीं।



