हरियाणा महिला आयोग चेयरपर्सन के एक्सटेंशन पर फिर विवाद:हाईकोर्ट के वकील ने शिकायत की, लिखा- 3 साल से ज्यादा नहीं होना चाहिए कार्यकाल
- Admin Admin
- Jan 19, 2026
हरियाणा महिला आयोग की चेयरपर्सन रेनू भाटिया के कार्यकाल विस्तार(एक्सटेंशन) को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। तीन साल का मूल कार्यकाल पूरा होने के बाद मिले एक्सटेंशन को अब एक साल बीत जाने पर फिर से सवालों के घेरे में लाया गया है। इस संबंध में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के वकील हेमंत कुमार ने सरकार को पत्र लिखकर शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने रेनू भाटिया को दिए गए अब तक के एक्सटेंशन को अवैध बताया है। दरअसल, रेनू भाटिया ने 19 जनवरी 2022 को हरियाणा महिला आयोग की चेयरपर्सन के रूप में पदभार संभाला था। उनका तीन साल का कार्यकाल 18 जनवरी 2025 को पूरा हो गया था। हालांकि, इससे पहले 26 नवंबर 2024 को महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से जारी पत्र में उनका कार्यकाल 18 जनवरी 2025 के बाद आगामी आदेशों तक बढ़ा दिया गया, जो अब तक जारी है। रेनू भाटिया इससे पहले दिसंबर 2017 से दिसंबर 2020 तक हरियाणा महिला आयोग में सदस्य के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। क्यों हो रहा है विवाद हाईकोर्ट के वकील हेमंत ने बताया कि हरियाणा राज्य महिला आयोग अधिनियम, 2012 की धारा 4 (1) में उल्लेख है कि आयोग की चेयरपर्सन, वाइस चेयरपर्सन और मेंबर का कार्यकाल 3 वर्ष से अधिक नहीं हो सकता। चूंकि भाटिया 18 जनवरी 2025 को अपने कार्यकाल के 3 वर्ष पूरे कर चुकी हैं, इसलिए उससे अधिक उन्हें उस पद पर बनाए रखने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग से जारी सरकारी आदेश पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए सरकार को कानूनी धारा में विधानसभा में संशोधन करना होगा। सदस्यों की नहीं की गई नियुक्ति हेमंत ने यह बताया कि यह अत्यंत आश्चर्यजनक है कि महिला आयोग की मौजूदा चेयरपर्सन रेनू भाटिया की नियुक्ति के 3 वर्ष का समय बीत जाने के बाद आज तक आयोग में 5 सदस्यों में से एक सदस्य की भी नियुक्ति नहीं की गई। यहां तक कि वाइस चेयरपर्सन के तौर पर सोनिया अग्रवाल की नियुक्ति भी रेनू भाटिया की चेयरपर्सन पद पर नियुक्ति के 2 वर्ष 2 महीने बाद की गई, जोकि एक वर्ष के लिए थी। ये है हरियाणा महिला आयोग का कानून हरियाणा राज्य महिला आयोग कानून, 2012 की धारा 3(2) (बी) के अनुसार आयोग में चेयरपर्सन के अतिरिक्त एक वाइस चेयरपर्सन और अधिकतम 5 सदस्य हो सकते हैं, जिन्हें प्रदेश सरकार द्वारा नॉमिनेट (नियुक्त) किया जाता है। इनमें से कम से कम एक सदस्य अनुसूचित जाति (SC) वर्ग से होना चाहिए। आयोग में एक सीनियर HCS अधिकारी के अलावा महिला IAS अधिकारी सदस्य सचिव होंगी। इसके अलावा महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रशासनिक सचिव आयोग में विशेष आमंत्रित सदस्य होंगी। इसी प्रकार महिला एवं बाल विकास विभाग की डायरेक्टर और DGP आयोग के पदेन (उनके पद के कारण) सदस्य होंगे।



