कर्नल होशियार सिंह की पत्नी से मिले बॉर्डर-2 फिल्म स्टार:पैर छूकर लिया आशीर्वाद, बोलीं-तुमने अच्छा काम किया, फिल्म बढ़िया चलेगी

बार्डर-2 फिल्म में हरियाणवी कर्नल शहीद होशियार सिंह का रोल अदा कर रहे वरूण धवन ने शहीद की पत्नी से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान वरूण धवन ने उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया। जिसका एक वीडियो सोशल मीडिया खूब वायरल हो रहा है। वरुण धवन अपनी आगामी फिल्म बॉर्डर 2 के प्रमोशन में व्यस्त हैं। फिल्म में, अभिनेता मेजर होशियार सिंह दहिया की भूमिका निभा रहे हैं, जो 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में लड़ने वाले एक वीर भारतीय सेना अधिकारी और परमवीर चक्र (पीवीसी) से सम्मानित थे। प्री-रिलीज इवेंट का एक वीडियो सामने आया है। जिसमें कर्नल होशियार सिंह दहिया की पत्नी फिल्म के प्री-रिलीज कार्यक्रम में वरुण को आशीर्वाद देती और मुस्कुराते हुए उनकी तारीफ करती नजर आ रही हैं। वीडियो में, कर्नल होशियार सिंह दहिया की पत्नी वरुण के सिर को छूकर मुस्कुराते हुए आशीर्वाद देती हुई दिखाई दीं। उन्होंने कहा, "तुमने बहुत बढ़िया किया है। बहुत बढ़िया, शाबाश! फिल्म बहुत अच्छी चलेगी।" वरुण झुके और धन्यवाद कहा। 22 सेकेंड के इस वीडियो में वरूण धवन कर्नल होशियार सिंह की पत्नी के सामने हाथ जोड़कर खड़े नजर आए। फिल्म को लेकर कुछ खास इवेंट्स: 4 पाइंट में समझिए सोनीपत के कर्नल दहिया का जीवन.. सोनीपत के सिसाना में हुआ जन्म : होशियार सिंक दिया का जन्म हरियाणा के सोनीपत जिले के गांव सिसाना में चौधरी हीरा सिंह के घर हुआ। रोहतक जाट कालेज में एक साल पढ़ाई के बाद ही वे सेना में भर्ती हो गए। उनका विवाह धन्नो देवी से हुआ। 30 जून 1963 को भारतीय सेना में ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट में कमीशन मिला। 30 जून 1965 को उन्हें लेफ्टिनेंट के पद पर पदोन्नत किया गया।​​​​​​​ 1965-71 के युद्ध में दिखाया कौशल : ​​​​​​​17 दिसंबर 1971 को दुश्मन ने भारी तोपखाने की मदद से एक बटालियन के साथ हमला किया। मेजर होशियार सिंह खुद गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद, बंदूक संभाले और दुश्मन को भारी नुकसान पहुंचाया। दुश्मन अपने कमांडिंग ऑफिसर और तीन अन्य अधिकारियों सहित 85 सैनिकों को पीछे छोड़कर भाग गया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद, मेजर होशियार सिंह ने युद्धविराम तक वहां से निकलने से इनकार कर दिया। मिल चुका है परमवीर चक्र: कर्नल होशियार सिंह को परमवीर चक्र का खिताब हासिल था। 30 जून 1976 को स्थायी मेजर के पद पर पदोन्नत किया गया। जिसके बाद उन्होंने मद्रास (अब चेन्नई) के अधिकारी प्रशिक्षण विद्यालय में दो वर्षों तक प्रशिक्षक के रूप में सेवा की। 1981 में उन्हें देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी में प्रशिक्षक के रूप में तैनात किया गया और 8 अप्रैल 1983 को उन्हें लेफ्टिनेंट-कर्नल के पद पर पदोन्नत किया गया। वे अपनी बटालियन के कमांडर बने। 1988 में रिटायर, 1998 में हुआ देहांत: 31 मई 1988 को कर्नल के मानद पद के साथ सेना से सेवानिवृत्त हुए। 6 दिसंबर 1998 को 61 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। उनके तीन बेटे जीवित थे, जिनमें से दो ने अपने पिता की तरह सेना में कमीशन अधिकारी के रूप में ग्रेनेडियर्स में प्रवेश किया, और एक ने तीसरे ग्रेनेडियर्स में शामिल हो गया।