विकसित भारत का मार्ग विश्वविद्यालयों से निकलेगा - राज्यपाल

उदयपुर, 07 जनवरी (हि.स.)। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे़ ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम बताते हुए विद्यार्थियों से सतत सीखने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

वे बुधवार को भूपाल नोबल्स विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह के मुख्य अतिथि राज्यपाल हरिभाऊ बागडे़ ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि गरीबी को यदि स्थायी रूप से समाप्त किया जा सकता है, तो उसका सबसे प्रभावी और सशक्त माध्यम शिक्षा ही है। शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि निरंतर आगे बढ़ने की जिज्ञासा और सीखते रहने का संकल्प ही जीवन को सार्थक बनाता है।

राज्यपाल ने कहा कि बीएन संस्थान की शुरुआत एक साधारण पाठशाला के रूप में हुई थी, जो आज एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय बनकर देशभर में अपनी पहचान बना चुका है। यह संस्थान समाज के उत्थान की उस सोच को साकार कर रहा है, जिसकी नींव मेवाड़ के प्रेरणापुरुष महाराणा भूपाल सिंह ने रखी थी। उन्होंने कहा कि महाराणा भूपाल सिंह शिक्षा और जनकल्याण में गहरी आस्था रखते थे। वर्ष 1945 में उनके द्वारा महल परिसर में औषधालय की स्थापना जरूरतमंदों के प्रति उनकी संवेदनशीलता और दूरदृष्टि को दर्शाती है।

दीक्षांत समारोह में राज्यपाल द्वारा विश्वविद्यालय के 90 शोधार्थियों को पीएचडी उपाधि प्रदान की गई। साथ ही 47 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक सहित कुल 2025 विद्यार्थियों को विभिन्न संकायों की स्नातक एवं स्नातकोत्तर डिग्रियां प्रदान की गईं।

मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए बागडे़ ने कहा कि यहां के शासक स्वयं को एकलिंगजी भगवान का प्रतिनिधि मानकर शासन करते थे। मेवाड़ के संस्थापक बप्पा रावल ने विदेशी आक्रांताओं का डटकर सामना कर मोहम्मद बिन कासिम को ईरान की सीमाओं तक खदेड़ा था। यह इतिहास आज भी नई पीढ़ी को प्रेरणा देता है।

राज्यपाल ने कहा कि मेवाड़ आदिवासी बहुल क्षेत्र है और इस अंचल में शिक्षा के प्रसार में बीएन संस्थान की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। जनजातीय समुदाय को उच्च शिक्षा से जोड़ना समय की आवश्यकता है, ताकि वे मुख्यधारा में शामिल होकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकें। वंचित और पिछड़े वर्ग का उत्थान आज देश की सबसे बड़ी जरूरत है।

उन्होंने “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य की चर्चा करते हुए कहा कि इसकी जिम्मेदारी युवाओं के कंधों पर है। देश का स्वर्णिम भविष्य विश्वविद्यालयों से ही निकलेगा और तक्षशिला व नालंदा जैसे प्राचीन ज्ञान केंद्रों का वैभव पुनः लौटे, ऐसी भावना विद्यार्थियों में होनी चाहिए। राज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि विगत 10 वर्षों में 25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं, जो सुशासन और समावेशी विकास का उदाहरण है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता