चंडीगढ़ में मुंबई के दंपती समेत 3 पर FIR:68 करोड़ की ठगी, व्यापार के नाम पर ठगा ,बैंक खातों और मनी ट्रेल की जांच
- Admin Admin
- Jan 17, 2026
चंडीगढ़ में व्यापार बढ़ाने का झांसा देकर 68 करोड़ रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने मुंबई के दंपती मीनाक्षी किशोर मेहता, निलाय किशोर मेहता और दुबई निवासी रूशिन मेहता के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। यह एफआईआर एसिक्स बायोसाइंसेज लिमिटेड कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधि, पंचकूला सेक्टर-21 निवासी गगन अग्रवाल की शिकायत पर दर्ज की गई है। पुलिस ने आरोपियों के लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों, बैंक खातों और मनी ट्रेल की जांच शुरू कर दी है। व्यवसाय बढ़ाने का झांसा देकर फंसाया पुलिस को दी शिकायत में गगन अग्रवाल ने बताया एसिक्स बायोसाइंसेज लिमिटेड वर्ष 2023 में मुंबई में अपने कारोबार का विस्तार करना चाहती थी। इसी दौरान आरोपियों ने संपर्क कर खुद को टू कैप फाइनेंस लिमिटेड और विल्सन होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड जैसी वित्तीय कंपनियों का मालिक बताया। आरोपियों ने मुंबई के अंधेरी ईस्ट में स्थित संपत्ति का स्वामित्व होने का दावा करते हुए संयुक्त विकास (ज्वाइंट डिवेलपमेंट) का प्रस्ताव दिया। आरोप है कि जालसाजों ने खुद को संपत्ति का मालिक बताया और कहा कि परियोजना तुरंत शुरू की जाएगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि सभी जरूरी कानूनी अनुमतियां उनके पास हैं और सुरक्षा जमा राशि ट्रस्ट में सुरक्षित रहेगी। साथ ही कंपनी को भरोसा दिलाया गया कि ली गई ब्याज-मुक्त रकम सिर्फ परियोजना के विकास में ही खर्च होगी। आरोपियों के दावों पर भरोसा कर 6 मार्च 2024 को ज्वाइंट डिवेलपमेंट एग्रीमेंट किया गया। इसके बाद मार्च 2024 में चंडीगढ़ स्थित एचडीएफसी बैंक खाते से 68 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए। पूरी रकम सीधे मिनाक्षी मेहता के निजी बैंक खाते में भेजी गई। न विकास हुआ, न अनुमति ली, रकम इधर-उधर की शिकायत के मुताबिक, रकम मिलने के बाद भी न तो परियोजना पर कोई काम शुरू किया गया और न ही कोई कानूनी अनुमति ली गई। इसके बजाय आरोपियों ने पूरा पैसा जल्दबाजी में अलग-अलग बैंक खातों में भेज दिया। यह रकम विल्सन होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड, सांघी स्टील उद्योग प्राइवेट लिमिटेड समेत उनके परिवार और समूह से जुड़ी अन्य कंपनियों में ट्रांसफर कर दी गई। कंपनी का आरोप है कि बार-बार संपर्क करने, लगातार आश्वासन मिलने और कानूनी नोटिस भेजे जाने के बावजूद आरोपियों ने न तो परियोजना का काम शुरू किया और न ही रकम वापस की। इसके बाद आर्थिक अपराध शाखा में शिकायत दी गई।



