चंडीगढ़ में अपने घर पहुंची उपिंदर कौर:मंत्री विक्रमादित्य की 65 साल की सास, ब्रेन ट्यूमर और मेनिनजाइटिस को हरा जीते चार मेडल
- DSS Admin
- Jun 13, 2026
चंडीगढ़ की 65 वर्षीय उपिंदर कौर सेखों ने ब्रेन ट्यूमर और मेनिनजाइटिस जैसी गंभीर बीमारियों को मात देकर मलेशिया में आयोजित 38वीं मलेशियन मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए चार पदक जीतकर भारत और चंडीगढ़ का नाम रोशन किए है। वह अब अपने घर चेडीगढ़ पहुंच गई है। वह हिमाचल के मंत्री विक्रमादित्य की सास है। उपिंदर कौर ने डिस्कस थ्रो और 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक हासिल किया, जबकि 100 मीटर और 200 मीटर स्पर्धा में रजत पदक अपने नाम किए। उनकी इस उपलब्धि की पूरे ट्राइसिटी में चर्चा हो रही है। तीन पाइंट मे जानिए उपिंदर कौर की बताई बातें 1. शादी के 13 साल बाद हुआ ब्रेन ट्यूमर आज अंतरराष्ट्रीय मंच पर मेडल जीतने वाली उपिंदर कौर की जिंदगी संघर्षों से भरी रही है। उन्होंने बताया कि शादी के करीब 13 साल बाद उन्हें ब्रेन ट्यूमर होने का पता चला था। उस दौर को याद करते हुए वह कहती हैं कि उस समय ब्रेन ट्यूमर का नाम सुनते ही उन्हें डर लगने लगा था। इलाज के बाद वह धीरे-धीरे सामान्य जीवन में लौट रही थीं कि कुछ वर्षों बाद उन्हें मेनिनजाइटिस जैसी गंभीर बीमारी ने घेर लिया। 2. खुद से उठना-बैठना भी था मुस्किल उपिंदर के मुताबिक वह समय उनकी जिंदगी का सबसे कठिन दौर था। बीमारी इतनी गंभीर हो गई थी कि वह खुद से उठ-बैठ भी नहीं सकती थीं। यहां तक कि बिस्तर की चादर बदलने के लिए भी परिवार के लोगों को उन्हें उठाकर दूसरी जगह रखना पड़ता था। लंबे इलाज, अनगिनत इंजेक्शन और कई मेडिकल परीक्षणों के बाद उन्होंने दोबारा जिंदगी की लड़ाई जीती। 3. फौजा सिंह और मान कौर से मिली प्रेरणा बीमारी से उबरने के बाद उपिंदर कौर ने हार मानने की बजाय खेल को अपनी ताकत बना लिया। वह विश्व प्रसिद्ध धावक फौजा सिंह और वरिष्ठ एथलीट मान कौर को अपना प्रेरणास्रोत मानती हैं। उपिंदर कहती हैं कि इन दोनों खिलाड़ियों की कहानियों ने उन्हें यह विश्वास दिलाया कि उम्र कभी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती। मलेशिया जाने से पहले ही कर लिया था लक्ष्य तय उपिंदर कौर ने बताया कि मलेशिया रवाना होने से पहले ही उन्होंने खुद से वादा कर लिया था कि खाली हाथ वापस नहीं लौटेंगी। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता में एक खिलाड़ी अधिकतम चार स्पर्धाओं में हिस्सा ले सकता था। ऐसे में उन्होंने चारों इवेंट्स में नामांकन कराया और अपने परिवार व दोस्तों से पहले ही कह दिया था कि वह चार मेडल जीतकर ही लौटेंगी। उनकी मेहनत और आत्मविश्वास रंग लाया और उन्होंने चारों स्पर्धाओं में पदक जीतकर अपना लक्ष्य हासिल कर लिया। 150 से ज्यादा मेडल, फिर भी हर मेडल खास उपिंदर कौर के पास विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के 150 से अधिक पदक हैं। लेकिन उनके लिए हर मेडल उतना ही महत्वपूर्ण है जितना पहला मेडल। वह अपने मेडल्स को बेहद संभालकर रखती हैं। इसके पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है। उपिंदर बताती हैं कि उन्होंने एक बार एक ओलंपियन खिलाड़ी की कहानी पढ़ी थी, जिसका गोल्ड मेडल यात्रा के दौरान सामान चोरी होने पर खो गया था। तभी से उन्होंने तय कर लिया कि मेडल कभी भी सामान के साथ नहीं रखेंगी। आज भी वह प्रतियोगिताओं में जीते मेडल अपने छोटे पर्स में रखती हैं और उन्हें अपने से अलग नहीं होने देतीं।

