चंडीगढ़ में 9 साइबर ठग गिरफ्तार:ऑपरेशन म्यूल हंट में पकड़े, ट्राईसिटी में सक्रिय थे, पैसों को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर
- Admin Admin
- Jan 19, 2026
चंडीगढ़ साइबर सेल ने ‘ऑपरेशन म्यूल हंट’ के तहत एक संगठित साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी म्यूल बैंक खातों के जरिए देशभर में साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर करने में शामिल थे। इन आरोपियों को साइबर सेल के डीएसपी वेंकटेश की सुपरविजन में थाना प्रभारी इंस्पेक्टर इरम रिजवी की अगुआई में टीम ने पकड़ा है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान ऋतिक, रिदम, आकाश, मोहम्मद दानिश, चारदास, अर्चित, मोहम्मद तोशिक, दिलप्रीत सिंह और अंकित के रूप में हुई है। इन धाराओं में हुआ केस दर्ज :धारा 112(2), धारा 317(2), धारा 61(2), धारा 318(4), धारा 351(2) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। जानिए कैसे हुआ ठगी के नेटवर्क का खुलासा गृह मंत्रालय के 14सी पोर्टल से पुलिस को सूचना मिली थी कि चंडीगढ़ के कई बैंक खाते दूसरे राज्यों में दर्ज साइबर ठगी की शिकायतों से जुड़े हैं। जांच में पता चला कि ये खाते म्यूल अकाउंट के तौर पर इस्तेमाल हो रहे थे। इन खातों के जरिए ऑनलाइन ठगी, पार्ट-टाइम जॉब के नाम पर धोखाधड़ी, डिजिटल अरेस्ट कॉल और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ी ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे खाते में भेजा जाता था, नकद निकाला जाता था और पैसों का असली स्रोत छुपाया जाता था। ट्राईसिटी में सक्रिय थे आरोपी एसपी साइबर सेल गीतांजली ने बताया पुलिस ने अलग-अलग एफआईआर में कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये सभी युवक चंडीगढ़, मोहाली और आसपास के इलाकों के रहने वाले हैं। आरोप है कि इन्होंने अपने बैंक खाते साइबर ठगों को इस्तेमाल के लिए दिए। बदले में इन्हें कमीशन मिलता रहा। इन खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम निकालने और आगे दूसरे खातों में भेजने के लिए किया गया। जांच के दौरान कई आरोपियों ने माना कि उनके खातों में अनजान लोगों ने बड़ी रकम डाली। बाद में यह पैसा कभी चेक के जरिए निकाला गया, कभी क्रिप्टोकरेंसी में बदला गया और कभी दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। इसके बदले आरोपियों को अच्छा-खासा कमीशन दिया जाता था। पैसों को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर पुलिस जांच में सामने आया कि सभी आरोपी जानते थे कि उनके बैंक खाते गलत और अवैध कामों के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं। ठगी से आए पैसे को छुपाने के लिए रकम को बार-बार अलग-अलग खातों में घुमाया गया, जिसे लेयरिंग कहा जाता है। जांच में यह भी पता चला कि सभी आरोपी आपस में मिलकर और योजना बनाकर काम कर रहे थे। म्यूल अकाउंट के जरिए उन्होंने साइबर ठगों को पैसा निकालने और आगे भेजने का सुरक्षित रास्ता दिया। पुलिस के मुताबिक, यह पूरा मामला संगठित साइबर अपराध से जुड़ा हुआ है। आम लोगों के लिए पुलिस की चेतावनी साइबर क्राइम पुलिस ने लोगों से सावधान रहने को कहा है। पुलिस के मुताबिक किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक, ओटीपी या यूपीआई की जानकारी बिल्कुल न दें। कमीशन या जल्दी पैसा कमाने के लालच में किसी को भी अपना बैंक खाता इस्तेमाल करने न दें। पार्ट टाइम जॉब, वर्क फ्रॉम होम, डिजिटल अरेस्ट या क्रिप्टो निवेश जैसे लुभावने ऑफर अक्सर ठगी का तरीका होते हैं, इसलिए इनसे दूर रहें।



