वेटर से ठग बने रॉकी का ठगी नेटवर्क:चंडीगढ़ के दंपत्ति से ठगे 38 लाख, USDT में बदली रकम चाइना में होनी थी ट्रांसफर, फाजिल्का की महिला समेत छह काबू

साइबर अपराधियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, यूटी चंडीगढ़ ने तथाकथित ‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर फ्रॉड के मामले का खुलासा किया है। पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल साइबर ठगी केस में 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने खुद को मुंबई पुलिस और CBI अधिकारी बताकर एक चंडीगढ़ निवासी से 38 लाख की ठगी की थी। गिरोह के सदस्य आसाम से चेन्नई आकर वेटर का काम करने वाले अफजल उर्फ रॉकी के कहने पर काम कर रहे थे। ठगी का पूरा खेल चेन्नई से हो रहा था और यहां के महज अकाउंट्स ही इस्तेमाल हो रहे थे। पकड़े गए आरोपियों में से एक महिला समेत छह आरोपी हैं। इनमें से एक युवक बुडैल का निवासी है जो भारतीय करंसी को क्रिप्टो करंसी में बदलता था और इसे रॉकी को देता था। बाकी के आरोपी उन्हें MULE बैंक अकाउंट मुहैया करवाते थे। ऐसे दिया गया डिजिटल अरेस्ट का डर चंडीगढ़ के गांव रायपुर के एक व्यक्ति ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 7 जनवरी 2026 की शाम उसे अज्ञात नंबरों से कॉल आईं। कॉल करने वालों ने खुद को कोलाबा पुलिस स्टेशन, मुंबई का अधिकारी बताते हुए कहा कि उसका बैंक कार्ड मनी लॉन्ड्रिंग केस में शामिल है। इसके बाद WhatsApp वीडियो कॉल पर पुलिस की वर्दी में एक व्यक्ति ने फर्जी गिरफ्तारी वारंट दिखाए और घर से बाहर निकलने पर अरेस्ट की धमकी दी। फिर “CBI Director” नाम से कॉल आई, जिसमें आधार कार्ड के दुरुपयोग की बात कही गई। डर और दबाव में आकर पीड़ित को RTGS के जरिए ₹38 लाख एक बैंक खाते में ट्रांसफर करने पर मजबूर कर दिया गया। पीड़ित और उसकी पत्नी को करीब 24 घंटे तक फोन पर डिजिटल अरेस्ट में रखा गया। जांच में खुला म्यूल अकाउंट और USDT कनेक्शन साइबर सेल की SP गीतांजलि खंडेलवाल ने बताया कि जांच के दौरान पुलिस ने बैंक खातों की KYC और लेन-देन की जांच की। पता चला कि ₹4.50 लाख चंडीगढ़ के एक खाते से चेक के जरिए निकाले गए थे। यह खाता वीणा रानी (फिरोजपुर) के नाम पर था। तकनीकी सर्विलांस के आधार पर वीणा को सेक्टर-32 चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने ठगी की रकम निकालकर कमीशन पर आगे देने की बात कबूल की। इसके बाद पुलिस ने धर्मिंदर उर्फ लड्डी, सुखदीप उर्फ सुख और सतनाम सिंह को गिरफ्तार किया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि ठगी की रकम को क्रिप्टोकरेंसी USDT में बदला जा रहा था। चंडीगढ़ से चेन्नई तक फैला नेटवर्क USDT में कन्वर्जन का काम मुकेश उर्फ प्रिंस कर रहा था, जिसे बुड़ैल, चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया गया। आगे जांच में सामने आया कि पूरा नेटवर्क चेन्नई निवासी फजल रॉकी के निर्देश पर चल रहा था। पुलिस टीम ने चेन्नई में छापा मारकर फजल रॉकी को उसके किराए के कमरे से गिरफ्तार किया। उसके पास से मोबाइल फोन, लैपटॉप, बैंक पासबुक और चेकबुक बरामद की गईं। आरोपी ने कबूल किया कि वह टेलीग्राम के जरिए चीनी नागरिकों के संपर्क में था और उनके निर्देश पर बैंक खातों से पैसा निकलवाकर USDT में बदलता था। हर ट्रांजैक्शन पर उसे 10% कमीशन मिलता था। बरामदगी का विवरण NCRP और I4C की मदद से बड़ी रकम होल्ड पुलिस ने बताया कि NCRP पोर्टल और गृह मंत्रालय के I4C के सहयोग से पीड़ित की अधिकतम राशि को बैंक खातों में होल्ड करा लिया गया है। सभी मोबाइल और बैंक खातों को साइबर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।