ज़ेब्रा क्रॉसिंग पर लापरवाही से कुचली गई युवती:चंडीगढ़ कोर्ट-परिवार को 23.43 लाख का मुआवजा देने के आदेश, बीमा कंपनी करेगी भुगतान

चंडीगढ़ में ज़ेब्रा क्रॉसिंग पर सड़क पार कर रही 24 वर्षीय साधना की मौत के मामले में मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT), चंडीगढ़ ने पीड़ित परिवार को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने हादसे के लिए वाहन चालक को दोषी मानते हुए मृतका के परिजनों को 23 लाख 43 हजार 530 रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया है। इस रकम पर 7.5 प्रतिशत सालाना ब्याज भी मिलेगा। कोर्ट ने कहा कि हादसा पूरी तरह से वाहन चालक की लापरवाही से हुआ। ज़ेब्रा क्रॉसिंग के पास न तो हॉर्न बजाया गया और न ही गाड़ी की रफ्तार कम की गई। मृतका के भाई की गवाही को कोर्ट ने सही माना। कोर्ट के आदेश के अनुसार माता-पिता और भाई-बहनों को तय हिस्से के अनुसार रकम दी जाएगी। एक नाबालिग बहन के हिस्से की राशि एफडीआर में जमा होगी, जो बालिग होने पर मिलेगी। यह फैसला उन मामलों के लिए मिसाल है, जहां ज़ेब्रा क्रॉसिंग पर पैदल चलने वालों की सुरक्षा को नजरअंदाज किया जाता है। सड़क पार करते समय हुआ हादसा यह हादसा 28 नवंबर 2023 को धनास इलाके में हुआ था। साधना अपने भाई सूरज के साथ घर जा रही थी। दोनों ज़ेब्रा क्रॉसिंग से सड़क पार कर रहे थे। इसी दौरान सारंगपुर की ओर से आई एक गाड़ी तेज रफ्तार और लापरवाही से आई और साधना को टक्कर मार दी। टक्कर के बाद साधना सड़क पर गिर गई और गाड़ी उसे कुचलते हुए निकल गई। उसे तुरंत सेक्टर-16 अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।कमाई के पुख्ता सबूत नहीं मिले परिजनों ने बताया कि साधना ट्यूशन पढ़ाती थी और बीमा एजेंट का काम भी करती थी, लेकिन इसकी पूरी लिखित पुष्टि नहीं हो सकी। इसलिए कोर्ट ने चंडीगढ़ की न्यूनतम मजदूरी 13,659 रुपए प्रति माह को उसकी आय माना। मुआवजे की रकम ऐसे तय हुई कोर्ट ने भविष्य की कमाई को ध्यान में रखते हुए आय में 40 फीसदी जोड़ा, फिर निजी खर्च घटाकर कुल मुआवजा 23.43 लाख रुपए तय किया। इसमें अंतिम संस्कार खर्च, संपत्ति हानि और परिवार को मिलने वाला सहारा भी शामिल है। कोर्ट ने साफ कहा कि वाहन बीमित था और चालक के पास वैध लाइसेंस था। इसलिए मुआवजे की पूरी राशि बीमा कंपनी को ही चुकानी होगी।