चंडीगढ़ एफडी घोटाला: वधवा की डिफॉल्ट बेल पर सुनवाई:CBI ने करोड़ों की संपत्तियों का ब्योरा कोर्ट में रखा, करीबी लोगों के नाम खरीदी संपत्तियां
- DSS Admin
- Jun 16, 2026
चंडीगढ़ में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड समेत हरियाणा के सरकारी विभागों के करोड़ों रुपए के एफडी घोटाले के कथित मास्टरमाइंड विक्रम वधवा की जमानत याचिका पर आज जिला अदालत फैसला सुनाएगी। वधवा ने जांच एजेंसी द्वारा तय समय सीमा में चालान पेश न किए जाने का हवाला देते हुए डिफॉल्ट बेल की मांग की है। मामला 116 करोड़ रुपए के एफडी घोटाले से जुड़ा है, जिसकी जांच फिलहाल सीबीआई कर रही है। इस केस में अब तक 10 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। सीबीआई ने चंडीगढ़ और पंचकूला की अदालतों में चार्जशीट भी दाखिल कर दी है। CBI ने कोर्ट में रखी करोड़ों की प्रॉपर्टी की जानकारी जांच के दौरान सीबीआई को ऐसे दस्तावेज मिले हैं, जिनके अनुसार विक्रम वधवा ने कथित तौर पर सरकारी धन का इस्तेमाल कर चंडीगढ़, मोहाली और न्यू चंडीगढ़ में करोड़ों रुपए की चल-अचल संपत्तियां खरीदीं। जांच एजेंसी के अनुसार वर्ष 2025 के दौरान वधवा ने करीब 69 करोड़ रुपए की आठ महंगी संपत्तियां खरीदीं, जिनमें प्लॉट, फार्म हाउस, मकान और अन्य निवेश शामिल हैं। दस्तावेजों के मुताबिक वधवा ने चंडीगढ़ के सेक्टर-33 में करीब 24.50 करोड़ रुपए का दो कनाल का प्लॉट खरीदा। इसके अलावा सेक्टर-21सी में लगभग 10 करोड़ रुपए का एक कनाल का डबल स्टोरी मकान भी खरीदा गया। जांच में यह भी सामने आया है कि न्यू चंडीगढ़ के मुल्लांपुर स्थित ओमैक्स कैसिया हिल्स में करीब 2.25 करोड़ रुपए का एक एकड़ का फार्म हाउस खरीदा गया। वहीं ग्रेटर पंजाब सोसायटी में करीब 4 करोड़ रुपए का 18 मरला का प्लॉट भी खरीदा गया, जिसकी रकम अग्रिम रूप से चुकाई गई थी। करीबी लोगों के नाम पर भी खरीदी गई संपत्तियां सीबीआई को कुछ ऐसे दस्तावेज भी मिले हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि कई संपत्तियां वधवा के करीबी लोगों के नाम पर खरीदी गईं। जांच में सामने आया कि कुछ भुगतान सीधे उसके खातों से किए गए, जबकि अधिकांश रकम विभिन्न शेल कंपनियों के खातों के जरिए ट्रांसफर की गई। जांच एजेंसियों ने इन संपत्तियों से संबंधित रिकॉर्ड अपने कब्जे में ले लिए हैं। इसके लिए चंडीगढ़ प्रशासन और गमाडा (GMADA) से भी संबंधित दस्तावेज जुटाए गए हैं। सरकारी धन को फर्जी कंपनियों के जरिए लगाया सीबीआई के अनुसार आरोपियों ने चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड, नगर निगम और अन्य सरकारी संस्थाओं की एफडी में जमा धन को फर्जी कंपनियों के माध्यम से रियल एस्टेट कारोबार में निवेश किया। धन के वास्तविक उपयोग को छिपाने के लिए कथित तौर पर फर्जी एफडी दस्तावेज भी तैयार किए गए। जांच एजेंसी का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क के जरिए सरकारी धन को विभिन्न कंपनियों और खातों में घुमाकर निवेश किया गया और उससे करोड़ों रुपए का लाभ कमाया गया।

