सड़क हादसे में फायरमैन की मौत:चंडीगढ़ कोर्ट- 26.94 लाख मुआवजा देने का आदेश, 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज समेत

चंडीगढ़ की मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) ने सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल राजेश कुमार जिसकी बाद में अस्पताल में मौत हो गई के मामले में फैसला सुनाया है। ट्रिब्यूनल ने हादसे को कार चालक की लापरवाही का नतीजा मानते हुए मृतक के परिजनों को कुल 26 लाख 94 हजार 484 रुपए मुआवजा देने के आदेश जारी किए हैं। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि केस लंबित रहते हुए राजेश कुमार का निधन हो गया था। इसके बाद उनकी पत्नी, बेटा और दो बेटियों को कानूनी वारिस के रूप में मामले में शामिल किया गया। अदालत ने आदेश दिए कि मुआवजे की राशि मृतक की पत्नी को सबसे अधिक हिस्सा देते हुए अन्य वारिसों में भी बांटी जाए। ट्रिब्यूनल ने बीमा कंपनी को निर्देश दिए कि वह 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित मुआवजे की राशि 15 दिन के भीतर लाभार्थियों के खातों में जमा कराए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि हादसे के समय कार चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन का बीमा मौजूद था, इसलिए मुआवजे की जिम्मेदारी बीमा कंपनी की बनती है। जानिए पूरा मामला क्या था 19 नवंबर 2020 को राजेश कुमार मोटरसाइकिल पर गांव जांदली से नवांशहर स्थित दोआबा कोऑपरेटिव शुगर मिल जा रहे थे। जब वह साहिब वैष्णो ढाबे के पास सड़क पार कर दाहिने मुड़ रहे थे, तभी नवांशहर की ओर से तेज रफ्तार कार ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में वह सड़क पर गिर पड़े और उन्हें पैर, कंधे, पसलियों समेत शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। घायल अवस्था में उन्हें रुपनगर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी कई सर्जरी हुईं। हादसे के बाद राजेश कुमार ने मोटर वाहन अधिनियम के तहत 50 लाख रुपये मुआवजे की मांग करते हुए दावा याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल के समक्ष एफआईआर, मेडिकल रिकॉर्ड, इलाज के बिल और गवाहों के बयान पेश किए गए। अदालत ने माना कि दुर्घटना कार चालक की तेज और लापरवाह ड्राइविंग के कारण हुई। 5 माह नहीं जा सके काम पर रिकॉर्ड के अनुसार, हादसे के समय राजेश कुमार नवांशहर की शुगर मिल में फायरमैन के पद पर कार्यरत थे और उनकी मासिक आय 36,335 रुपए आंकी गई। हादसे के कारण उन्हें स्थायी रूप से 40 प्रतिशत विकलांगता हुई और करीब पांच महीने तक वह काम पर नहीं जा सके। ट्रिब्यूनल ने अलग-अलग खर्चों और नुकसान को ध्यान में रखते हुए मुआवजा तय किया। इसमें भविष्य की कमाई का नुकसान, इलाज पर हुआ खर्च, इलाज के दौरान सैलरी का नुकसान, खास खान-पान, देखभाल करने वाले का खर्च, आने-जाने का खर्च और सामान्य जीवन की सुविधाओं में आई कमी शामिल है। इन सभी को जोड़कर कुल मुआवजा 26.94 लाख रुपए तय किया गया।