चंडीगढ़ ने पंजाब कैपिटल एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव भेजा:केंद्र से मांगा अधिकार, बिल्डिंग वायलेशन जुर्मानों से राहत की तैयारी, 5 हजार मामले लंबित

चंडीगढ़ में बिल्डिंग वायलेशन और मिसयूज के मामलों में लग रहे भारी जुर्मानों से लोगों को राहत देने की दिशा में यूटी प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। प्रशासन ने केंद्र सरकार को पंजाब कैपिटल एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव भेजा है, ताकि जुर्माने की दरों को कम करने का अधिकार चंडीगढ़ प्रशासन को मिल सके। केंद्र और संसद से मंजूरी मिलने के बाद यह संशोधन चंडीगढ़ में लागू किया जाएगा। प्रशासन इस समय बिल्डिंग वायलेशन के पुराने लंबित मामलों को निपटाने की प्रक्रिया में है। मुख्य सचिव के अनुसार, संपदा विभाग के पास करीब 5 हजार बिल्डिंग वायलेशन के मामले लंबित हैं। इनमें से कई मामलों में जुर्माने की राशि इतनी अधिक हो चुकी है कि वह संबंधित इमारत और जमीन की कीमत से भी ज्यादा है। कई मामलों में स्थिति यह है कि जुर्माना चुकाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं रह गया है। जुर्माना कम करने का अधिकार नहीं प्रशासन का कहना है कि एक बार जुर्माना बढ़ जाने के बाद उसे कम करने का अधिकार इस समय गृह मंत्रालय के पास है। राज्यों में सरकारें अपने स्तर पर जुर्माने की दरों में बदलाव कर सकती हैं, लेकिन केंद्रीय शासित प्रदेशों में यह अधिकार सीधे प्रशासन के पास नहीं होता। हालांकि गृह मंत्रालय ने देश के कुछ अन्य केंद्रीय शासित प्रदेशों को यह अधिकार दिया है, लेकिन चंडीगढ़ को अब तक यह सुविधा नहीं मिली है। व्यापारियों में बढ़ता तनाव एस्टेट ऑफिस की ओर से समय-समय पर बिल्डिंग वायलेशन और मिसयूज के नोटिस जारी किए जाते हैं। सबसे ज्यादा नोटिस कॉमर्शियल इमारतों को भेजे जा रहे हैं। इन नोटिसों के चलते व्यापारियों और उद्योगपतियों पर इमारत की कीमत के बराबर या उससे ज्यादा जुर्माने की तलवार लटकी हुई है। व्यापार मंडल के अध्यक्ष संजीव चड्ढा का कहना है कि हजारों रुपए के मिसयूज और वायलेशन नोटिस मिलने से व्यापारी मानसिक तनाव में हैं। जुर्माने की राशि लगातार बढ़ती जा रही है, जबकि कई मामलों में इमारत की कीमत उससे कम है। जरूरत के अनुसार किए गए छोटे बदलावों को नियमित करने की मांग लंबे समय से की जा रही है। सुनवाई में देरी, बुजुर्ग की मौत के बाद तेजी मिसयूज और वायलेशन से जुड़े कई मामले आला अधिकारियों के पास वर्षों से लंबित हैं। पिछले साल एक सीनियर सिटिजन की सुनवाई के दौरान सचिवालय में मौत के बाद प्रशासन ने कई मामलों के निपटारे में तेजी लाई है। 5 नवंबर को 78 वर्षीय चरणजीत सिंह की वित्त सचिव के समक्ष सुनवाई का इंतजार करते हुए हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। वे अपनी पत्नी के साथ सुनवाई के लिए पहुंचे थे। हालांकि जिन मामलों में जुर्माना बहुत ज्यादा बढ़ चुका है, उन्हें निपटाने में अब भी परेशानी आ रही है, क्योंकि मौजूदा नियमों के तहत जुर्माना माफ नहीं किया जा सकता। 2007 में आखिरी बार बदली थी दर एस्टेट ऑफिस की ओर से जुर्माने की दरों में आखिरी बार वर्ष 2007 में संशोधन किया गया था। उस समय जुर्माना 20 रुपए प्रति वर्गफुट प्रति माह से बढ़ाकर 500 रुपए प्रति वर्गफुट प्रति माह कर दिया गया था। प्रशासन का कहना है कि अगर पंजाब कैपिटल एक्ट में संशोधन हो जाता है और जुर्माना कम करने का अधिकार मिल जाता है, तो हजारों लंबित मामलों का समाधान हो सकेगा और आम लोगों व व्यापारियों को बड़ी राहत मिलेगी।