चंडीगढ़ एक करोड़ डिजिटल अरेस्ट के आरोपी की जमानत खारिज:कोर्ट बोली—ऐसे अपराध समाज के लिए बेहद घातक, दलील FIR में नहीं नाम

चंडीगढ़ जिला अदालत ने करीब 1 करोड़ 1 लाख रुपए के डिजिटल अरेस्ट और साइबर फ्रॉड मामले में आरोपी अभिषेक कुमार की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि साइबर अपराध सामान्य अपराधों से कहीं अधिक गंभीर होते हैं। ये अपराध अक्सर संगठित गिरोहों द्वारा देश के अलग-अलग हिस्सों से अंजाम दिए जाते हैं। ऐसे मामलों में जमानत देने से समाज में गलत संदेश जाएगा और अपराध को बढ़ावा मिलेगा। अदालत ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट जैसे अपराध लोगों में डर पैदा कर उनकी जमा पूंजी को निशाना बनाते हैं, जिससे समाज पर दूरगामी और घातक प्रभाव पड़ता है। इसलिए समाजहित को प्राथमिकता देना जरूरी है। वकील बोला नहीं FIR में नाम अदालत में आरोपी के वकील ने दलील दी कि आरोपी का नाम एफआईआर में दर्ज नहीं है, उससे कोई बरामदगी शेष नहीं है और वह 23 जुलाई 2025 से न्यायिक हिरासत में है। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि सह-आरोपी मोहम्मद सुहैल अख्तर अंसारी को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से पहले ही नियमित जमानत मिल चुकी है और ट्रायल लंबा चल सकता है, इसलिए आरोपी को भी जमानत दी जानी चाहिए। 250 रुपए प्रति सिम में बेचता था नए सिम सरकारी वकील ने जमानत का विरोध करते हुए कोर्ट को बताया कि जांच के दौरान आरोपी ने स्वीकार किया कि उसके पास एयरटेल का पीओएस आईडी था, जिसके जरिए वह नए सिम कार्ड जारी करता था। आरोप है कि वह ग्राहकों से केवाईसी दस्तावेज लेकर सिम अपने पास रख लेता था और बाद में उन सिम कार्डों को 250 रुपए प्रति सिम के हिसाब से एयरटेल के एक अन्य कर्मचारी को बेच देता था। इन्हीं सिम कार्डों का इस्तेमाल साइबर ठगी में किया गया। जानिए पूरा मामला क्या था शहर की रहने वाली एक महिला ने साइबर थाना पुलिस में डिजिटल अरेस्ट कर साइबर ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़िता के अनुसार 11 जुलाई को उन्हें एक अज्ञात फोन आया, जिसमें कॉलर ने कहा कि उनके नाम पर जारी मोबाइल नंबर संदिग्ध गतिविधियों और मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल है। इसके बाद उन्हें वॉट्सऐप कॉल आई, जिसमें कॉलर ने खुद को सीबीआई क्राइम ब्रांच अधिकारी सुनील बताया। कॉलर ने महिला को उनके नाम की आईसीआईसीआई बैंक पासबुक की तस्वीर भेजी और दावा किया कि यह खाता उनके आधार कार्ड का दुरुपयोग कर खोला गया है। डर का माहौल बनाकर उन्हें “क्लीन चिट” दिलाने की बात कही गई। इसके लिए भारत सरकार की मुहर वाला फर्जी पत्र भेजा गया और बैंक खातों की जानकारी हासिल की गई। ठगों ने महिला को डराकर कहा कि वह अपनी सारी जमा पूंजी सुरक्षित रखने के बहाने बताए गए “सेफ कस्टडी अकाउंट्स” में ट्रांसफर कर दे। पीड़िता ने अलग-अलग बैंक खातों में करीब 1 करोड़ 1 लाख रुपए जमा कर दिए। बाद में सच्चाई सामने आने पर उन्हें ठगी का एहसास हुआ, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा।