आइडिया के दम पर राष्ट्रीय स्तर के ब्रांड बने शहर के स्टार्टअप्स

16 जनवरी को नेशनल स्टार्टअप डे था। 2026 का मकसद टिकाऊ ग्रोथ के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल और अगली पीढ़ी के इनोवेटर्स को सशक्त बनाना है। ट्राईसिटी के कई स्टार्टअप अपने आइडिया के बलबूते पर राष्ट्रीय स्तर के ब्रांड बने, अच्छी फंडिंग हासिल की। उन्हीं आंत्रप्रिन्योर्स से ‘उद्देश्य के साथ इनोवेशन’ और इंडस्ट्री अप्रोच के बारे में जाना मधुप यादव ने। आइडिया सही हो तो फंडिंग आसानी से मिलती है, क्योंकि इन्वेस्टर पैशन और मेहनत को देखते हैं। इस रीजन में जो जरूरी है वह जीसीसी (ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर), जिससे कम्युनिटी को बढ़ावा मिले। बैंगलुरू को सिलीकॉन वैली ऑफ इंडिया इसलिए कहा जाता है क्योंकि वह जीसीसी का हब है, इससे 1859 स्टार्टअप्स जुड़े हैं। 200 सेंटर्स इंडिया में और आ रहे हैं। पिछले हफ्ते ही मोहाली में पहला जीसीसी सेंटर आया, जिससे यहां स्टार्टअप को मदद होगी। नॉर्थ में ऐसे और सेंटर्स की जरूरत है। - प्रताप के. अग्रवाल, पूर्व चेयरमैन व मेंटर यूथ एंगेजमेंट पैनल सीआईआई पिछले हफ्ते मोहाली में पहला ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर आया _photocaption_एक्सपर्ट एडवाइज...*photocaption* _photocaption_आंखें व ब्रेन लगाकर रोबोट तैयार किया... *photocaption* _photocaption_बतौर आंत्रप्रिन्योर क्या इंपेक्ट, सर्विस ला रहे हैं... *photocaption* _photocaption_अब अच्छे फाउंडर को कैपिटल चेज कर रही है... *photocaption* स्टार्टअप - टैराफेक फंडिंग - प्री-सीड राउंड में यूके व यूएस से साढ़े छह करोड़ टर्नओवर - चार महीने में 80 लाख साल 2022 में स्टार्टअप शुरू किया, जिसे विजन व एआई से जोड़ा। सरकार से 15 लाख की ग्रांट मिली और 20 लाख का लोन लिया। अभी यह यूके व यूएस में होता है। इसे इंडिया में बिल्ड कर रहे हैं, ताकि इंडियन ऑटोमेशन में पकड़ मजबूत हो। आंखें व ब्रेन लगाकर रोबोट बनाया है, जिससे कंप्यूटर बेस्ड मेन्युफैक्चरिंग व वेल्डिंग में मदद होगी। अगले राउंड में 40 करोड़ की फंडिंग की उम्मीद। एडवाइज - मेन्युफैक्चरिंग को एआई के जरिए अगले स्तर पर ले जाना हमारा मकसद है। ऐसे स्टार्टअप के िलए विजन स्ट्रॉन्ग आैर इनोवेशन की समझ होनी चाहिए। तभी यह सफल होंगे। - अनुभि, मोहाली स्टार्टअप - ईवेज फंडिंग - एफडीआई से 180 करोड़ टर्नओवर - 200 से 225 करोड़ साल 2014 में स्टार्टअप बनाया। मकसद था ट्रांसपोर्टेशन, सामान को इधर-उधर पहुंचाने में आसानी हो और प्रदूषण कम से कम हो। 7 साल में इनर टेक्नोलॉजी बनाई। इलेक्ट्रिक डिलीवरी वैन, ट्रक और बस बनाई। नॉर्थ से पहला स्टार्टअप बना, जिसने इलेक्ट्रिक ट्रक का सॉल्यूशन दिया। देशभर में पहुंचे और अब यूरोपियन देशों के लिए बसों को इंपोर्ट करने के काम किया जा रहा है। एडवाइज - बतौर आंत्रप्रिन्योर क्या इंपेक्ट व सर्विस स्टार्टअप लेकर आ रहा है यह अहम है। ऐसा स्टार्टअप हो जो जिंदगी को आसान बनाए। उसमें किसी भी तरह की इनोवेशन व टेक्नोलॉजी हो सकती है। - हरनूर कौर व इंद्रवीर सिंह पनेसर, मोहाली स्टार्टअप - लाहौरी जीरा फंडिंग - पहले 175 करोड़ फंडिंग मिली, अब मोतीलाल आेसवाल ग्रुप से 200 करोड़ टर्नओवर - लगभग 750 करोड़ वैसे तो इनोवेशन ही आपको राजा बनाती है, लेकिन मार्केटिंग, पैकेजिंग, आउट ऑफ बॉक्स सॉल्यूशन और कंपीटिटिव रहना भी जरूरी है। बेवरेज ब्रांड बनाते हुए हमें यही था कि अलग क्या करें। स्वाद, बॉटल, पैकेजिंग से लेकर कनेक्शन में। इसमें जुटे रहे और आठ साल बाद कामयाबी मिली। 4 करोड़ आउटपुट से शुरुआत की थी। एडवाइज- सबसे पहले स्टार्टअप समझो कि बिजनेस की क्वालिटी कितनी असरदार है। पहले कैपिटल नहीं थी जिस कारण फंडिंग के लिए भटकना पड़ता था। अब अच्छे फाउंडर को कैपिटल चेज कर रही है। - सौरभ मुंजाल, चंडीगढ़