सुखना लेक में आधा लीटर से ज्यादा ऑयल गिरने का मामला सामने आया है। फॉरेस्ट एंड वाइल्डलाइफ डिपार्टमेंट ने शुक्रवार सुबह ही पंप की मदद से लेक से ऑयल निकाल लिया है। तेल गिरने से जहां लेयर बनी थी, वहां से सीपीसीसी ने पानी और तेल के सैंपल लिए हैं। इनकी रिपोर्ट जल्द तैयार होकर सबमिट की जाएगी। रेगुलेटरी एंड की तरफ कुछ मरी हुई मछलियां मिलीं, जिनके सैंपल भी जांच के लिए भेजे गए हैं। इस घटना के बाद सीनियर अधिकारियों की मीटिंग हुई, जिसमें सिटको, चंडीगढ़ पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी (सीपीसीसी), टूरिज्म और अन्य विभाग शामिल हुए। फैसला लिया गया कि अब लेक पर फ्यूल वाली कोई भी बोट नहीं चलेगी। केवल इलेक्ट्रिक या सोलर एनर्जी वाली बोट्स ही चलेंगी। यह नियम स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट की बोट्स और रेस्क्यू बोट्स पर भी लागू होगा। वैसे भी लेक पर ज्यादातर पैडल बोट्स, शिकारे या सोलर क्रूज ही चलते हैं। सुखना एक वैटलैंड घोषित है, इसलिए प्रदूषण रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ टीम ने किया दौरा... शुक्रवार को वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) की टीम ने भी सुखना लेक का दौरा किया और बोटिंग एरिया की जांच की। यह कदम आगे ऐसी लापरवाही रोकने और लेक को सुरक्षित रखने के लिए उठाए गए हैं। हाल में वैटलैंड अथॉरिटी की मीटिंग में सुखना लेक के लिए इंटीग्रेटेड मैनेजमेंट प्लान को मंजूरी मिली है, जिस पर करीब 25 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस प्लान के तहत लेक के ज्यादा से ज्यादा इलाके में सीसीटीवी सर्विलांस लगाया जाएगा। एंट्री पॉइंट से लेकर रेगुलेटरी एंड तक और जंगल की तरफ कुछ पॉइंट्स पर कैमरे इंस्टॉल किए जाएंगे। बोटिंग, क्रूज और वॉटर स्पोर्ट्स के लिए स्पष्ट एरिया तय होगा, जो आईलैंड के आसपास तक सीमित रहेगा। इस हिस्से की प्रिजर्वेशन और रखरखाव पर खास ध्यान दिया जाएगा। लेक में गिरा तेल निकाला गया, मरी मिलीं थीं मछलियां, सीपीसीसी ने लिए सैंपल



