सिविल जज भर्ती की उत्तर पुस्तिका के पुनर्मूल्यांकन की मांग खारिज, हाईकोर्ट ने कहा-रिव्यू का अधिकार सीमित
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- Jan 14, 2026
चंडीगढ़ | हाईकोर्ट ने रोहतक के व्यक्ति को भतीजे की हत्या में दी गई उम्रकैद की सजा से बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन का पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था लेकिन घटनाओं की श्रृंखला पूर्ण नहीं थी। जस्टिस लीसा गिल और जस्टिस मीनाक्षी आई मेहता की खंडपीठ ने वर्ष 2015 में ट्रायल कोर्ट द्वारा सूरजमल को हत्या और आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत दोषी ठहराए जाने के निर्णय को रद्द कर दिया। खंडपीठ ने कहा कि हमारे विचार में दिए गए तथ्यों और परिस्थितियों में अपीलकर्ता संदेह का लाभ पाने का अधिकारी है। पहले ही खारिज हो चुकी थी रिट याचिका याचिकाकर्ता ने पहले हाईकोर्ट में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) भर्ती परीक्षा 2023-24 के विज्ञापन की क्लॉज 33 को चुनौती देते हुए अंग्रेज़ी पेपर-चार के प्रश्न संख्या 2(x) के अपने उत्तर के पुनर्मूल्यांकन की मांग की थी। साथ ही उसने उक्त प्रश्न में अंक प्रदान कर अंतिम चयन सूची में सफल घोषित किए जाने का आग्रह किया था। 28 फरवरी 2025 को हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दिया था। भास्कर खास पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) भर्ती परीक्षा की एक अभ्यर्थी द्वारा दायर समीक्षा याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि समीक्षा (रिव्यू) का अधिकार अत्यंत सीमित है और इसका उपयोग अपील के विकल्प के रूप में या मामले को दोबारा मेरिट पर बहस के लिए नहीं किया जा सकता। चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस सुमित गोयल की खंडपीठ ने कहा कि कोर्ट परीक्षक के निर्णय पर सुपर इवेल्युएटर के रूप में कार्य नहीं कर सकता। यह निर्विवाद है कि समीक्षा की शक्ति का उद्देश्य उस मामले को दोबारा सुनना नहीं है जिस पर पूरी तरह बहस हो चुकी हो और निर्णय दिया जा चुका हो। इसका उद्देश्य केवल रिकॉर्ड पर स्पष्ट त्रुटि, कोर्ट द्वारा हुई प्रत्यक्ष गलती, किसी नए एवं महत्वपूर्ण तथ्य या साक्ष्य की खोज अथवा अन्य कारणों को दुरुस्त करना है। खंडपीठ ने फैसले में कहा कि समीक्षा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि न्याय अनजाने में हुई भूल, चूक या प्रत्यक्ष त्रुटि के कारण बाधित न हो, न कि किसी पक्षकार को पहले से तय मुद्दों पर दोबारा बहस का अवसर देना। हाईकोर्ट यह मामला 260 दिनों की देरी को माफ करने की अर्जी के साथ दायर समीक्षा याचिका पर सुन रहा था।



