जीरकपुर–पंचकूला बायपास की टेक्निकल बिड खुली:फरवरी में मिलेगा निर्माण कार्य का ऑर्डर, 1878 करोड़ का प्रोजेक्ट, 4 राज्यों के ट्रैफिक को रोकेगा

करीब 10 साल की योजना, जमीन अधिग्रहण और अलग-अलग विभागों से मंजूरी लेने की लंबी प्रक्रिया के बाद अब जीरकपुर–पंचकूला बायपास को लेकर बड़ी राहत मिली है। इस प्रोजेक्ट के लिए आई कंपनियों की टेक्निकल बिड खोल दी गई है और अगले महीने बायपास बनाने का काम किसी कंपनी को सौंपे जाने की संभावना है। 16 जनवरी को इस परियोजना के टेंडरों की टेक्निकल बिड खोली गई, जिसके बाद अब फाइनेंशियल बिड और अन्य औपचारिकताओं की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) पंजाब डिवीजन के अधिकारियों के मुताबिक टेक्निकल बिड में कोई बड़ी अड़चन सामने नहीं आई है और फरवरी में निर्माण कार्य शुरू करने वाली कंपनी को वर्क ऑर्डर जारी कर दिया जाएगा। करीब 1878.31 करोड़ रुपए की लागत से बनेगा। जानिए क्यों अटकी टेक्निकल बिड प्रक्रिया पिछले साल केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद इस प्रोजेक्ट के लिए कई विभागों की अनुमति जरूरी थी। सबसे पहले पंजाब सरकार ने शुरुआती मंजूरी दी। इसके बाद पर्यावरण मंत्रालय से शुरुआती अनुमति मिली। जून में टेंडर निकाले गए, लेकिन दूसरी मंजूरियां देर से मिलने के कारण टेंडर की तारीख छह बार आगे बढ़ानी पड़ी। आखिरकार दिसंबर में पंजाब सरकार के वन विभाग से अंतिम मंजूरी मिली। इसके बाद चंडीगढ़ स्थित पर्यावरण मंत्रालय के कार्यालय से भी अनुमति मिल गई। इन सभी मंजूरियों के बाद आखिरकार टेक्निकल बिड खोलने का रास्ता साफ हो सका। परियोजना की प्रमुख खासियतें यह हैं कि इस बायपास की योजना करीब दस साल पहले तैयार की गई थी। साल 2020 में इसके लिए जमीन अधिग्रहण का काम पूरा कर लिया गया था। यह बायपास 19.2 किलोमीटर लंबा होगा और इसमें 6 लेन बनाई जाएंगी। इसका रास्ता जीरकपुर के छत गांव से शुरू होकर चंडीमंदिर तक जाएगा। यह बायपास ट्राइसिटी के बाहर बनने वाले प्रस्तावित रिंग रोड का एक अहम हिस्सा होगा। ट्रैफिक को बाहर ही रोक देगा यह बायपास जीरकपुर में आने वाले भारी ट्रैफिक को बाहर ही रोक देगा। पंजाब की ओर से आने वाला एनएच-7, अंबाला से होकर हिमाचल जाने वाला एनएच-152 और देहरादून समेत अन्य इलाकों से आने वाले वाहन अब जीरकपुर में प्रवेश नहीं करेंगे, बल्कि सीधे बायपास से होकर निकल जाएंगे। इन सभी को सीधे बायपास से जोड़कर जीरकपुर के अंदर आने से रोका जाएगा। ऐसा होगा बायपास का रूट यह बायपास छत गांव के पास से शुरू होगा। इसके बाद यह एनएच-152 को पार करेगा और ढकोली के पीछे से होकर गुजरेगा। फिर यह पंचकूला के सेक्टर-20 और 21 के पास से निकलेगा। अंत में बायपास चंडीमंदिर के पास परवाणू हाईवे से जुड़ जाएगा। बायपास के दोनों सिरों पर ट्रैफिक को आसानी से मोड़ने के लिए आधुनिक इंटरचेंज बनाए जाएंगे। ट्रैफिक को सुचारू रखने के लिए इस बायपास पर खास इंतजाम किए जाएंगे। छत गांव और चंडीमंदिर के पास तीन स्तर वाले इंटरचेंज बनाए जाएंगे। इसके अलावा मल्टीलेवल कल्वर्ट, ओवर पास और अंडरपास भी बनाए जाएंगे। इन इंतजामों से बायपास पर सिग्नल-फ्री ट्रैफिक की सुविधा मिलेगी और वाहन बिना रुके चल सकेंगे। छत गांव से वेस्टर्न कमांड तक ट्रैफिक बिना सिग्नल के चलेगा। हाइब्रिड एन्युटी मॉडल पर बनाया जाएगा यह प्रोजेक्ट हाइब्रिड एन्युटी मॉडल पर बनाया जाएगा, जिससे काम बीच में रुकने की संभावना बहुत कम रहेगी। इस मॉडल के तहत कुल लागत का 40 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार देगी, जबकि बाकी 60 फीसदी पैसा निर्माण करने वाली कंपनी बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से जुटाएगी। इससे पैसों की कमी के कारण काम रुकने की समस्या नहीं आएगी। यह बायपास ट्राइसिटी के लिए बेहद अहम साबित होगा। इसके पूरा होने के बाद जीरकपुर में लगने वाले जाम से बड़ी राहत मिलेगी। लंबी दूरी के वाहनों को शहर के अंदर नहीं आना पड़ेगा। इससे चंडीगढ़, मोहाली, पंचकूला और जीरकपुर में ट्रैफिक का दबाव काफी कम हो जाएगा।