पुणे में सीनियर इकोलॉजिस्ट डॉ. माधव गाडगिल का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

मुंबई, 08 जनवरी (हि.स.)। पुणे के वैकुंठ श्मशान घाट में सीनियर इकोलॉजिस्ट डॉ. माधव गाडगिल का गुरुवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उन्हें तीन तोपों की सलामी दी गई। पर्यावरणविदों और पुणे के लोगों ने नम आंखों से उन्हें भावभीनी विदाई दी। इस मौके पर डॉ. गाडगिल का परिवार, उनके छात्र और पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाले प्रतिनिधि मौजूद थे। इस बीच राजनीतिक, सामाजिक और पर्यावरण क्षेत्र के कई जाने-माने लोगों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी।

डॉ. माधव गाडगिल का आज पुणे के एक अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया था। उनके बेटे सिद्धार्थ गाडगिल ने अपने पिता को श्मशान धाट में मुखाग्नि दी। इसके बाद उनका राजकीय संस्कार के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उल्लेखनीय है कि एक महीने पहले, 5 दिसंबर को, वनराई संस्था के सालाना स्पेशल इश्यू के पब्लिकेशन में उनकी स्पीच उनकी जिंदगी की आखिरी स्पीच बन गई। वनराई के एग्जीक्यूटिव एडिटर और प्रेसिडेंट रवींद्र धारिया ने कहा कि उनकी बहुत नाजुक सेहत के बावजूद, देवराय की सुरक्षा के लिए उन्होंने जो चिंता जताई और जो संदेश दिया कि अगर देवराय बचेंगे, तो इंसान बचेंगे वह आज और भी ज़्यादा मतलब वाला लगता है। सह्याद्री के जंगलों में पाई जाने वाली बांस की जावित्री और मांगा प्रजाति के बीच का अंतर पहली बार रिसर्च के ज़रिए साफ़ हुआ है। सीनियर पर्यावरणविद डॉ. माधव गाडगिल के सम्मान में बांस की जावित्री की प्रजाति का नाम ‘स्यूडोऑक्सीट्रेनेंथेरा माधवी’ रखा गया है। निगडी में ज्ञानप्रबोधिनी बायोटेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट में बांस की जावित्री की प्रजाति पर रिसर्च और स्टडी चल रही है। यह प्रजाति जिले के वेल्हे इलाके में भी पाई जाती है। टिशू कल्चर से तैयार इस प्रजाति के पौधे डॉ. गाडगिल को देने की इच्छा थी। हालांकि, डिपार्टमेंट की डायरेक्टर संगीता कुलकर्णी ने अफ़सोस जताया कि यह इच्छा पूरी नहीं हो पाई। उन्होंने यह भी कहा कि अब वे ये पौधे गाडगिल के परिवार को देंगी। जीव विज्ञान के लिए शांतिस्वरूप भटनागर पुरस्कार, विक्रम साराभाई पुरस्कार, ईश्वर चंद्र विद्यासागर पुरस्कार, हार्वर्ड विश्वविद्यालय का शताब्दी पदक, कर्नाटक सरकार का राज्योत्सव पुरस्कार, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में उत्कृष्टता के लिए फिरोदिया पुरस्कार, उष्णकटिबंधीय जीव विज्ञान और इसके संरक्षण पर शोध कार्य के लिए एटीबीसी (एसोसिएशन फॉर ट्रॉपिकल बायोलॉजी एंड कंजर्वेशन) की मानद फेलोशिप, 2015 में दक्षिणी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय का टायलर पुरस्कार, समाज के 146वें स्थापना दिवस के अवसर पर पुणे प्रार्थना समाज पुरस्कार, एक लंबी भूमिका वाली पुस्तक वरुल पुराण के लिए मराठी साहित्य परिषद द्वारा विशेष पुस्तक लेखक पुरस्कार 2018, विकास-एक महानाट्य पुस्तक के लिए अखिल भारतीय मराठी प्रकाशक संघ द्वारा सर्वश्रेष्ठ पुस्तक निर्माण पुरस्कार 2020, कुसुमाग्रज प्रतिष्ठान द्वारा गोदावरी गौरव पुरस्कार 2020, विकास: एक महानाट्य पुस्तक के लिए राठी विज्ञान परिषद द्वारा विज्ञान पुस्तक पुरस्कार 2021 डॉ. माधव गाडगिल को प्राप्त हुए थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव