शिक्षकों के आवारा कुत्तों की गिनती संबंधी फर्जी सूचनाएं फैलाने वालों के खिलाफ शिक्षा निदेशालय ने पुलिस में दर्ज कराई शिकायत
- Admin Admin
- Jan 01, 2026
नई दिल्ली, 01 जनवरी (हि.स.)। दिल्ली के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के जरिए आवारा कुत्तों की गिनती संबंधी फर्जी और भाम्रक सूचना सोशल और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय ने सोशल और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फैलाई जा रही सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को आवारा कुत्तों की गिनती संबंधी झूठी, भ्रामक सूचनाओं का गंभीर से संज्ञान लिया है। उसने दिल्ली के विभिन्न थानों में फर्जी, भ्रामक और शिक्षक बनकर रील बनाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई संबंधित गुरुवार को शिकायत दर्ज कराई है।
शिक्षा निदेशालय ने गुरुवार को दिल्ली सचिवालय में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा निदेशालय द्वारा ऐसा कोई आदेश, निर्देश, परिपत्र या नीतिगत निर्णय जारी नहीं किया गया है। प्रसारित किए जा रहे दावे पूरी तरह से मनगढ़ंत, निराधार और झूठे हैं और शिक्षा विभाग के किसी भी आधिकारिक निर्णय या निर्देश से इनका कोई संबंध नहीं है।
निदेशालय ने यह स्पष्ट किया कि 20-11-2025 का परिपत्र केवल सुप्रीम कोर्ट के स्वतः संज्ञान रिट याचिका (सिविल) संख्या 5/2025, जिसका शीर्षक शहर में आवारा कुत्तों का आतंक, बच्चों को भुगतना पड़ रहा है है, के निर्देशों के अनुपालन में जारी किया गया था। परिपत्र का एकमात्र उद्देश्य सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और उचित प्रवेश नियंत्रण उपायों के माध्यम से आवारा कुत्तों को विद्यालय परिसर में प्रवेश करने से रोककर छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।
निदेशक ने इस बात पर जोर दिया कि उक्त परिपत्र में शिक्षकों द्वारा आवारा कुत्तों की गिनती करने का कोई ज़िक्र नहीं है। शिक्षकों की पेशेवर गरिमा, शैक्षणिक भूमिका और सम्मान सर्वोपरि है। निदेशालय ने बताया कि फर्जी प्रचार के प्रसार को देखते हुए उसने 30-12-2025 को एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से स्थिति स्पष्ट की थी, जिसमें साफ तौर पर कहा गया था कि शिक्षा निदेशालय द्वारा ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं किया गया था। इस आधिकारिक स्पष्टीकरण के बावजूद, झूठी और भ्रामक सामग्री जानबूझकर प्रसारित और बढ़ाई जाती रही, जो दुर्भावनापूर्ण इरादे और जनता को गुमराह करने के समन्वित प्रयास का संकेत देती है।
विभाग ने सोशल मीडिया पर प्रतिरूपण के ऐसे मामले भी देखे हैं, जिनमें व्यक्ति वीडियो और रीलों के माध्यम से खुद को आवारा कुत्तों की गिनती करने वाले शिक्षक के रूप में गलत तरीके से पेश कर रहे हैं। ऐसे कृत्य गंभीर अपराध हैं। इसको देखते हुए शिक्षा निदेशालय ने सिविल लाइंस पुलिस स्टेशन, उत्तरी जिला, नई दिल्ली में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें झूठी कहानी के स्रोत, निर्माण और प्रसार की जांच की मांग की गई है। इस तरह की गलत सूचना फैलाने में शामिल सोशल मीडिया हैंडलों की एक सूची पुलिस के साथ साझा की गई है।
शिकायत में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि उक्त कृत्यों पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत आपराधिक मानहानि, सार्वजनिक उपद्रव, जालसाजी, प्रतिरूपण और भ्रामक इलेक्ट्रॉनिक सामग्री के प्रकाशन या प्रसारण से संबंधित अपराधों सहित प्रावधान लागू होते हैं। शिक्षा निदेशालय ने अनुरोध किया है: जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ उचित एफआईआर दर्ज की जाए। गलत सामग्री के मूल प्रवर्तकों और अग्रेषितकर्ताओं की पहचान करने के लिए गहन जांच की जाए। इस तरह के कृत्यों की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए कानून के अनुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
शिक्षा निदेशालय मीडिया संगठनों और नागरिकों से अपील करता है कि वे किसी भी सामग्री को प्रकाशित या साझा करने से पहले आधिकारिक स्रोतों से जानकारी सत्यापित करें, विशेष रूप से शिक्षा और छात्र सुरक्षा से संबंधित संवेदनशील मुद्दों पर। शिक्षा निदेशालय छात्रों की सुरक्षा, शिक्षकों की गरिमा को बनाए रखने और सार्वजनिक विश्वास और संस्थागत विश्वसनीयता को कमजोर करने वाली जानबूझकर फैलाई गई गलत सूचना के खिलाफ कड़ी कार्रवाई मांग की गई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव



