हरियाणा : 22 जिला अटॉर्नी बने डिप्टी डायरेक्टर

चंडीगढ़, 02 जनवरी (हि.स.)। हरियाणा में लागू हुए तीन नये आपराधिक कानूनों के बाद अभियोजन व्यवस्था में बड़े प्रशासनिक बदलाव शुरू हो गए हैं। इन्हीं बदलावों के तहत सरकार ने 22 जिला अटॉर्नी (डीए) अधिकारियों को प्रमोट कर डिप्टी डायरेक्टर ऑफ प्रॉसिक्यूशन (डीडीपी) के पद पर नियुक्त किया है। यह प्रमोशन नये कानूनों में किए गए प्रावधानों के अनुरूप किया है।

इसका उद्देश्य जिला स्तर पर अभियोजन व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाना है। नये कानूनों के तहत सेक्शन-20 में यह स्पष्ट प्रावधान किया गया है कि प्रत्येक जिले में निदेशालय का गठन होगा और उसका प्रमुख डिप्टी डायरेक्टर होगा। गृह विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा की ओर से यह आदेश जारी किए हैं।

आदेश के अनुसार, यह प्रमोशन हरियाणा स्टेट लीगल सर्विसेज (ग्रुप-ए) संशोधित नियम, 2025 के तहत किए गए हैं और ये सभी नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू होंगी। प्रमोशन वरिष्ठता के आधार पर किए गए हैं और सभी अधिकारी एक वर्ष की परिवीक्षा (प्रोबेशन) अवधि पर रहेंगे। प्रमोट किए गए अधिकारियों में सुमन बंसल, सोहन सिंह, लेघहा दीपक रंजीत, सतीश कुमार, आनंद मान, सुनील कुमार व सत्येंद्र कुमार शामिल हैं।

इसी तरह से राजेश कुमार चौधरी, धर्मेंद्र राणा, मनोज कुमार, दीपक बूरा, हरपाल सिंह, अनीता, राजेश कुमार, परवेज, सुमेर सिंह, हितेंद्र सिंह, नरेंद्र सिंह, मनजीत सिंह, अश्विनी कुमार, चौधरी, सुरेश कुमार व पारुल चहल को भी प्रमोट करके डिप्टी डायरेक्टर बनाया गया है। सरकार के इस फैसले से लंबे समय से खाली पड़े डिप्टी डायरेक्टर के पदों को भरने की प्रक्रिया को गति मिली है।

अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे ये पद भरे जाएंगे, उसी अनुपात में डिप्टी डीए और अन्य निचले पदों पर भी प्रमोशन के रास्ते खुलेंगे। इसी क्रम में संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में असिस्टेंट डायरेक्टर के पदों पर भी नियुक्तियां की जा सकती हैं।

नये आपराधिक कानूनों का उद्देश्य केवल प्रक्रिया में बदलाव नहीं, बल्कि अभियोजन तंत्र को जमीनी स्तर पर मजबूत करना है। जिला स्तर पर निदेशालय बनने से मामलों की निगरानी बेहतर होगी, अभियोजन में देरी कम होगी और जवाबदेही तय करना आसान होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा