लुधियाना में श्री गुरु-ग्रंथ-साहिब का स्वरूप न देने पर विवाद:सिख सत्कार कमेटी ने अकाल तख्त से कार्रवाई मांगी जांच

लुधियाना जिले के गांव हवास में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के स्वरूप को लेकर सामने आया मामला अब गंभीर विवाद का रूप ले चुका है। इस प्रकरण को लेकर ऑल इंडिया सिख सत्कार कमेटी ने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार को मांग-पत्र सौंपकर निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। सिख सत्कार कमेटी के पदाधिकारियों ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि गांव के गुरुद्वारा साहिब की प्रबंधक कमेटी ने एक सिख को उसके घर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का स्वरूप देने से इनकार कर दिया। आरोप है कि संबंधित सिख लंबे समय से गुरुद्वारा साहिब की परची नहीं कटवा रहा था, जिसके चलते कमेटी ने यह शर्त रखी कि जब तक परची नहीं कटेगी, तब तक स्वरूप नहीं दिया जाएगा। परची के बिना स्वरूप न देने का फैसला निंदनीय कमेटी ने इस फैसले को पूरी तरह निंदनीय बताते हुए कहा कि यह सिख मर्यादा के खिलाफ है। उनका कहना है कि किसी सिख को केवल परची या सेवा के नाम पर गुरु ग्रंथ साहिब जी के प्रकाश से रोकना बेहद गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण है। सिख सत्कार कमेटी ने यह भी आरोप लगाए कि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में कोई भी अमृतधारी या केशधारी सिख शामिल नहीं है। इतना ही नहीं, कमेटी सदस्यों द्वारा शाम के समय शराब सेवन करने के सबूत और तस्वीरें भी मीडिया के सामने पेश की गई हैं। कमेटी के अनुसार, जिस सिख को स्वरूप देने से रोका गया, वह गांव का मौजूदा सरपंच है, जबकि इनकार करने वाला व्यक्ति चुनाव में हारा हुआ सरपंच है। राजवंत सिंह, मौजूदा सरपंच, ने कहा कि उन्हें गांव की गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने गुरु ग्रंथ साहिब देने से इनकार कर दिया और कहा कि उन्हें इसके लिए 1 लाख 11 हजार रुपए देने होंगे। आरोप है कि यह पूरा विवाद राजनीतिक रंजिश और निजी दुश्मनी का नतीजा है। वही मौजूदा सरपंच और ऑल इंडिया सिख सत्कार कमेटी ने श्री अकाल तख्त साहिब से मांग की है कि इस पूरे मामले की गहराई से जांच करवाई जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। इस घटना को लेकर पूरे पंजाब में सिख संगतों में भारी रोष देखने को मिल रहा है।