बठिंडा में बच्चा बदलने के आरोपों पर DNA टेस्ट हुआ:निजी अस्पताल की डॉक्टर पर FIR, परिजन बोले- लड़के की जगह लड़की सौंपी
- Admin Admin
- Jan 05, 2026
बठिंडा में ढाई महीने की बच्ची का डीएनए टेस्ट सरकारी डॉक्टरों के बोर्ड की निगरानी में कराया गया है। यह टेस्ट बच्चा बदलने के आरोपों के बाद किया गया है, जिसमें एक निजी अस्पताल की डॉक्टर पर FIR दर्ज की गई है। परिजन का आरोप है कि लिख में लड़का बताया और फिर लड़की सौंप दी। यह मामला पिछले दो महीने से चर्चा में है। परिवार स्पष्ट रूप से अस्पताल पर बच्चा बदलने का आरोप लगा रहा है, जबकि अस्पताल प्रबंधन इसे बच्चे की डिस्चार्ज स्लिप में हुई 'क्लेरिकल मिस्टेक' बता रहा है। अब डीएनए रिपोर्ट ही इस पूरे मामले की सच्चाई सामने लाएगी। पुलिस ने कहा कि 3 महीने बाद रिपोर्ट आएगी, तभी कुछ कहा जाएगा। 13 अक्टूबर को हुई थी डिलिवरी हरियाणा के सिरसा जिले के गांव जोगेवाला के रहने वाले शिवराज सिंह ने बताया कि मेरी पहले से दो लड़कियां हैं। मेरी पत्नी जीतो कौर गर्भवती थी, जिसको 13 अक्टूबर को दर्द होने लगा तो मैं, अपनी सास अमरजीत कौर व आशा वर्कर अमरीक कौर के साथ पत्नी को सुबह 6 बजे सरकारी अस्पताल ले गए, जहां डाक्टरों ने थोड़ा समय रुकने को कहा तो आशा वर्कर अमरीक कौर उनको अपने जान पहचान वाली डॉक्टर आशा गोयल के अस्पताल में ले गईं। जहां वो सुबह 7 बजे पहुंच गए। जहां डॉक्टर आशा गोयल ने कहा कि ऑपरेशन होगा, हमारी सहमति के बाद डा. आशा गोयल ने मेरी पत्नी को एडमिट कर लिया। इसके बाद आशा वर्कर अमरीक कौर वहां से चली गई। मैंने 3 हजार रुपए अस्पताल के काउंटर पर गुगल-पे किए और 7 हजार रुपए कैश जमा करवाए। सुबह 10 बजे गोयल ऑपरेशन थिएटर से बाहर आई और कहा कि उनके लड़का हुआ है, जो सीरियस है, उसे बच्चों के अस्पताल में दाखिल करवाना होगा। उस समय दूसरे अस्पताल की डॉक्टर दीप्त बजाज भी ऑपरेशन थिएटर में मौजूद थी। इसके बाद डॉक्टर आशा गोयल ने एम्बुलेंस बुलाई और मैं बच्चे को लेकर एम्बुलेंस में आगे बैठ गया और मेरी बहन मंजीत कौर पीछे बैठ गई। हम बच्चे को लेकर उनके अस्पताल में पहुंच गए। वजन और रिकॉर्ड में भी भारी विरोधाभास परिवार के मुताबिक, निजी अस्पताल में बच्चे का वजन 2.6 किलोग्राम दर्ज किया गया, जबकि दूसरे अस्पताल में वही वजन 3.2 किलोग्राम बताया गया। साथ ही बच्चे का लिंग भी बदलकर लड़की दर्शा दिया गया। इन विरोधाभासों ने परिवार के संदेह को और गहरा कर दिया। पीड़ित परिवार ने पहले सिविल लाइन थाना बठिंडा में शिकायत दी थी, लेकिन कार्रवाई में देरी के चलते उन्हें अदालत का रुख करना पड़ा। कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद पुलिस हरकत में आई और अब मामले की गहन जांच शुरू की गई है। जांच अधिकारी बोले-3 महीने बाद आएगी रिपोर्ट इस पूरे मामले की जांच कर रहे सिविल लाइन थाना के जांच अधिकारी जसकरण सिंह ने कहा कि डीएनए टेस्ट की रिपोर्ट 3 महीने बाद आएगी। इसके बाद इस मामले में कुछ कहा जाएगी। हालांकि अभी अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई बयान जारी नहीं किया गया।



